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मन की बात में पीएम मोदी ने पानी को बताया परमात्मा का प्रसाद

Sun, 22 May 2016 11:39 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम मोदी ने की 20वीं मन की बात
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मेरे लिए मन की बात कर्मकाण्ड नहीं है। मैं स्वयं ही आपसे बातचीत करने के लिए उत्सुक रहता हूं। ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 20 वें 'मन की बात' में कहीं। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा भेजी जाने वाली चिट्ठियां, फोन कॉल्स और माइजीओवीडॉटइन (mygov.in) पर मिलने वाले सुझावों से उन्हें सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र लोगों की भागीदारी से चलता है। पीएम मोदी चाहते हैं कि हमेशा जनहित के लिए बात हो। पीएम मोदी ने मन की बात में बढ़ती गर्मी का जिक्र करते हुए कहा कि मानसून में देरी से चिंता बढ़ गई है और हमने प्रकृति का विनाश खुद किया है।
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उन्होंने कहा कि पेड़ कम होने से दिक्कत शुरू हुई है। पीएम ने हाल ही में सूखे पर राज्यों के साथ हुई बैठक जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हर राज्य के मुखिया से करीब 2 से ढाई घंटे तक बात की और उनकी बात सुनी। पीएम ने कहा कि उन्होंने हर राज्य से अलग अलग बात की और सूखे से निपटने के लिए कई राज्यों ने अपना सर्वोत्तम काम किया है। उन्होंने कहा कि अगर चाहता तो मैं सबके साथ एक ही मीटिंग कर सकता था। हमने सूखे से निपटने के लिए स्थायी निदान पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जंगल पानी को बचाना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि पानी परमात्मा का प्रसाद है, यदि एक बूंद भी बर्बाद हो तो पीड़ा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारे तेलंगाना के भाइयों ने नर्मदा और गोदवरी के जल का भागीरथी योजना के तहत बेहतर उपयोग किया है। आंध्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नीरू योजना से लाभ हुआ है। पीएम ने कहा कि हमें खेती के तरीके बदलने की जरूरत है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात ने सिंचाई के तरीकों में बदलाव किया है।
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जल संरक्षण की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि जून, जुलाई, अगस्त सितंबर में पानी की एक बूंद भी बर्बाद न होने दे। बहुत पानी देख कर बेपरवाह नहीं होना चाहिए और इस बार पानी बचाकर दीपावली का आनंद लें। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारी जरूरत पूरी करता है। हमें जल संचय और सिंचाई को आधुनिक बनाना चाहिए। सूखे और जल संरक्षण पर राज्यों की कार्यशैली पर पीएम मोदी ने कहा कि कुछ राज्यों ने नदियों में बांध बना कर पानी रोकने का प्रयास किया है। मीडिया से अपील करते हुए पीएम ने कहा कि उन्हें जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए।

बैंकिंग प्रणाली की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि मोबाइल के जरिए पैसों का लेन देन आसान होगा और पूरी दुनिया कैसलेस सोसाइटी की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जन धन,आधार और मोबाइल के तालमेल से कैशलेस सोसाइटी की ओर बढ़ सकते हैं।

रियो ओलंपिक की बात करते हुए पीएम ने कहा कि खेल मंत्री और असम के भावी मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल ने इस संबंध में काम किया है।  वो असम चुनाव के दौरान बिना किसी को बताए पंजाब के पटियाला  गए और उन्होंने नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान पहुंचे और वहां मौजूद खिलाड़ियों के खान पान की व्यवस्था देखी।

मध्य प्रदेश के गौरव पटेल के ईमेल की बात करते हुए पीएम ने कहा कि गौरव ने माई जीओवी डॉट इन पर लिखा है कि  'एमपी के बार्ड एग्जाम में 89.33 प्रतिशत मिले हैं। मैंने सोचा था कि जब मैं घर पहुंचुंगा  तो सारे तरफ से मुझे मिठाइयां मिलेंगी, लेकिन सब ये कह रहे थे कि अगर तेरे चार मार्क्स और आ जाते तो तेरे 90 प्रतिशत हो जाते? अब मुझे समझ नहीं आता कि मैं इसे कैसे हैंडल करूं?' इस पर पीएम ने कहा कि मैंने आपकी चिट्ठी बहुत ध्यान से पढ़ी और यह सिर्फ आपकी समस्या नहीं है।

उन्होंने कहा कि हर चीज में असंतोष खोजने से संतोष की ओर नहीं बढ़ सकते। पीएम ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों के जो भी परिणाम आएं हैं उस पर संतोष करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करिए। राजस्थान के राजेश गिरी की चिट्ठी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि इनकी भी समस्या गौरव जैसी ही है। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों पर अपेक्षाएं न थोपें और क्या जो असफल हो जाता है क्या उसकी जिंदगी रुक जाती है? पीएम मोदी ने मन की बात में 21 जून को होने वाले योग दिवस की चर्चा भी की और कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में 20 से 30 मिनट तक योग करना चाहिए।

पीएम मोदी ने बताया कि अब लोग उनकी मन की बात 1922 डायल कर के सुन सकते हैं। मन की बात से विदा लेते हुए पीएम ने कहा कि 'मेरी पानी वाली बात नहीं भूलना।'
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