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कला के साथ-साथ कला के पारखियों की भी जरूरत : पंडित बिरजू महाराज

Fri, 22 Feb 2019 10:49 PM IST
Gaurav Pandey अतुल सिन्हा, नई दिल्ली
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पंडित बिरजू महाराज
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रंगमंच की दुनिया में नए-नए प्रयोगों और कई नए नाटकों के मंचन के साथ 20वां भारत रंग महोत्सव खत्म हो गया। कथक की पाठशाला कहे जाने वाले पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज को इस मौके पर सुनना एक अविस्मरणीय अनुभव था। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से अपने गहरे जुड़ाव और तमाम नृत्यशैलियों के साथ नाटकों की प्रस्तुतियों के बारे में पंडित बिरजू महाराज से बेहतर भला कौन बोल सकता है। आखिरी दिन कमानी सभागार में पंडित जी विशिष्ट अतिथि थे और उनका कहना था कि किसी भी कलाकार का मकसद प्यार और खुशी फैलाना होता है। कला के विकास के साथ साथ कला के पारखियों की भी जरूरत है, साथ ही उन दर्शकों की भी जो वाकई कला और कलाकार को समझते हों।

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पिछले साल भारत रंग महोत्सव की जगह थिएटर ओलम्पिक का बड़े स्तर पर आयोजन हुआ था। जबरदस्त प्रचार-प्रसार के साथ थिएटर ओलम्पिक को केंद्र सरकार और संस्कृति मंत्रालय ने खूब मदद की थी। इस बार परंपरागत तरीके से 21 दिनों तक भारत रंग महोत्सव चला। सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, वाराणसी, रांची, मैसूर, डिब्रूगढ़ और राजकोट में भी भारत रंग महोत्सव के नाटक खेले गए। इस दौरान हिंदी के 25 और बंगाली के 16 नाटक पेश किए गए। इनके अलावा कन्नड़, असमिया, मराठी, उड़िया, गुजराती, मलयाली, तेलुगू, तमिल और मैथिली नाटक तक का आनंद रंगप्रेमियों ने उठाया।
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इस बार कोशिश यह भी रही कि ज्यादातर युवाओं को इससे जोड़ा जाए। इसके तहत तमाम स्कूल कॉलेजों के करीब 2000 युवाओं ने अपने नुक्कड़ नाटकों के साथ इस समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बाहर के देशों की कई रंगमंडलियां भी दिखीं। एनएसडी सोसाइटी के चेयरमैन डॉ अर्जुनदेव चारण और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रभारी निदेशक सुरेश शर्मा इस आयोजन को लेकर खासे उत्साहित थे और उनका कहना था कि रंगमंच एक ऐसा क्षेत्र है जहां रोजगार की जबरदस्त संभावनाएं हैं। हमारी कोशिश है कि इसका विस्तार हो और कलाकारों को इसके जरिये बाकायदा रोजगार मिले, उनकी कला का सम्मान मिले।
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समापन समारोह के अंत में आकर्ष खुराना के निर्देशन में नाटक ‘धूम्रपान’ का मंचन किया गया। इसे मुंबई की संस्था डी फॉर ड्रामा ने पेश किया। इसमें हास्य और व्यंग्य के जरिये तनावपूर्ण कॉरपोररेट जीवन शैली और इससे जुड़ी समस्याओं को बेहतर तरीक से पेश किया गया।

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