बुंदेलखंड का सूखा बना बड़ी मुसीबत
- फोटो : बीबीसी
केंद्र तो मानता है कि हरियाणा में सूखा है, मगर खुद हरियाणा सरकार ऐसा नहीं मानती। लोकसभा में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री रामकृपाल यादव ने बृहस्पतिवार को यह बात कही। सूखे के कारण पेयजल संकट से संबंधित सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि 13 राज्यों के 206 जिले और करीब दो लाख गांव इससे प्रभावित हैं। इस दौरान लोकसभा में सूखा और पेयजल संकट पर प्रश्न पूछने की होड़ से स्पीकर सुमित्रा महाजन बेहद नाराज हो गईं। उन्होंने बेहद नाराजगी भरे स्वर में कहा कि अगर मुझ पर चिल्लाने से पानी मिलता है तो खूब चिल्लाईये।
प्रश्नकाल के दौरान पेयजल स्वच्छता मंत्री ने कहा कि देश के 13 राज्य सूखे की चपेट में हैं। मगर इस आशय की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित महज 11 राज्यों ने ही दी है। उन्होंने कहा कि सूखा और इसके कारण पेजयल का संकट हरियाणा और बिहार में भी है। मगर यहां की राज्य सरकारें ऐसा नहीं मानती। इन दो राज्यों ने इसी कारण नियमानुसार केंद्र को अपनी रिपोर्ट भी नहीं भेजी है।
मंत्री ने कहा कि केंद्र ने इस स्थिति से निपटने के लिए अब तक 1937 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। नियमानुसार राज्यों को भी इसमें 50 फीसदी अंशदान देना होता है। ऐसे में इस संकट से निपटने की रकम करीब 4000 करोड़ रुपये है। इस दौरान रामकृपाल ने यह भी कहा कि वाटर प्यूरीफायर का एक प्लांट लगाने में करीब 600 करोड़ का खर्च आता है। ऐसे में बिना राज्यों के सहयोग के इसे सभी जगह लगाया जाना संभव नहीं है।
इससे पहले सूखा और पेयजल पर सवाल पूछने की सदन में होड़ मच गई। स्पीकर ने पहले तो इसी विषय पर बृहस्पतिवार को ही अल्पकालिक चर्चा होने की बात कह अधिक सदस्यों को सवाल पूछने की इजाजत देने से इंकार किया। इसके बावजूद कई सांसद अपनी अपनी सीट पर खड़े हो कर सवाल पूछने की इजाजत मांगने लगे। करीब 2-3 मिनट के हंगामे के बाद स्पीकर बेहद नाराज हो गईं। उन्होंने कहा कि अगर सांसदों को लगता है कि स्पीकर पर चिल्लाने से उनके क्षेत्र में पानी आ जाएगा तो उन्हें ऐसा जरूर करना चाहिए।