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Maharashtra: ATS द्वारा गिरफ्तार पांच को HC से जमानत, पुणे सनबर्न फेस्टिवल में धमाके की साजिश रचने का था आरोप

Tue, 06 Aug 2024 03:23 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र के नालासोपारा में पांच साल पहले (2018) हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था। पुणे के सनबर्न फेस्टिवल में ब्लास्ट की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार पांच लोगों को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है।
 
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Bombay High court - फोटो : ANI
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2018 के हथियार बरामदगी मामले और पुणे में सनबर्न फेस्टिवल पर हमला करने की कथित साजिश रचने के मामले में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) द्वारा गिरफ्तार किए गए पांच लोगों को जमानत दे दी है। अदालत ने साजिश के आरोप को साबित करने के लिए अपर्याप्त सबूतों का हवाला दिया है।

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न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने 30 जुलाई के आदेश में आरोपी व्यक्तियों के लंबे समय तक कैद में रहने पर भी ध्यान दिया। पीठ ने यह भी पाया कि मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना कम है।

सनबर्न फेस्टिवल को निशाना बनाने का था मकसद
साल 2018 में महाराष्ट्र के नालासोपारा में हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था। एटीएस ने ठाणे जिले के नालासोपारा इलाके में दो अन्य आरोपियों के आवास से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद करने के बाद 2018 में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने दावा किया था कि पुणे में सनबर्न फेस्टिवल को निशाना बनाने के लिए हथियारों और विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जाना था। नापाक मंसूबा पाल रहे आरोपी पुणे में सनबर्न फेस्टिवल में धमाके से दहशत फैलाने की योजना बना रहे थे।
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सबूत काफी नहीं
पीठ ने अपने आरोपपत्र में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों के बयानों और अन्य सबूतों पर ध्यान दिया और कहा कि ये काफी नहीं हैं। अदालत ने कहा कि हमने शुरुआती राय बनाई है कि ये बयान अपीलकर्ताओं के खिलाफ साजिश के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। 

अदालत ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि कथित हमलों में से कोई भी नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि सनबर्न कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक पूरा हो गया  था, लेकिन मौजूदा मामले में गिरफ्तारी कार्यक्रम समाप्त होने के आठ महीने बाद अगस्त 2018 के पहले सप्ताह में की गई। आरोपियों को 2018 में गिरफ्तार किया गया था और अब तक मुकदमे में केवल दो गवाहों को तलब किया गया है। अभियोजन पक्ष मामले में 417 गवाहों से पूछताछ करना चाहता है।

पीठ ने आगे कहा कि सुनवाई समय पर पूरी होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति के मौलिक अधिकार के रूप में शीघ्र सुनवाई को मान्यता दी गई है। अदालत ने कहा कि पांचों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी और उन्हें महीने में एक बार एटीएस के मुंबई कार्यालय में तथा प्रत्येक सुनवाई के लिए निचली अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।

अदालत आरोपियों द्वारा दायर पांच अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार करने के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।

कौन हैं पांच आरोपी?
आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पांच आरोपियों सुजीत रंगास्वामी, अमित बड्डी, गणेश मिस्किन, श्रीकांत पंगारकर और भरत कुराने को 2018 में गिरफ्तार किया गया था।

एटीएस ने दो आरोपियों शरद कालस्कर और वैभव राउत से पूछताछ के दौरान उनके आवासीय परिसरों पर छापा मारा था और नालासोपारा से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए थे। दोनों के बयानों के आधार पर 10 अन्य को गिरफ्तार किया गया।

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