गुजरात के ऊना में 2016 में चार दलितों के साथ अत्याचार के मामले में विशेष अदालत ने पांच दोषियों को पांच साल की सजा और 5,000 रुपये जुर्माना लगाया। अदालत ने एससी/एसटी एक्ट के साथ आईपीसी की कई धाराओं में भी सजा सुनाई, जो एक साथ चलेगी, जबकि 35 आरोपियों को बरी किया गया। पूरा मामला क्या था, पढ़िए रिपोर्ट-
गुजरात के ऊना में चार दलितों को साल 2016 में सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने के मामले में एक विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने पांच दोषियों को पांच साल की सजा सुनाई है और प्रत्येक दोषी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इन दलितों को उस समय पीटा गया था, जब वे कथित रूप से एक मरी हुई गाय की खाल उतारने की कोशिश कर रहे थे।
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दोषियों को कितनी सजा सुनाई गई?
वेरावल की विशेष अदालत ने इस मामले में सोमवार को पांच लोगों को दोषी ठहराया था। वहीं, 35 लोगों को बरी कर दिया गया था। इस घटना के समय देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। मंगलवार को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत पांच साल की कैद सुनाई।
अधिकतम पांच साल की सजा के अलावा, अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 324 के तहत तीन साल की जेल, धारा 342 के तहत एक साल की जेल और धारा 504 के तहत दो साल की जेल की सजा भी सुनाई। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
मामला क्या हुआ था?
यह घटना 11 जुलाई 2016 को गिर सोमनाथ जिले के ऊना कस्बे के पास मोटा समधियाला गांव में हुई थी, जब चार दलित युवक एक गाय की खाल उतार रहे थे, जिसकी मौत पहले किसी अन्य गांव में हो गई थी। वे पारंपरिक रूप से गाय की खाल उतारने का काम करते थे।