13 फरवरी 2001 को सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर कमलेश कुमारी संसद भवन परिसर के गेट नंबर 12 के स्केनर पर तैनात थी। उसने देखा कि विजय चौक से एक कार जिस पर गृह मंत्रालय और संसद भवन का स्टीकर लगा हुआ था, गेट नंबर 12 की तरफ आ रही है। जैसे ही वह कार निकट पहुंची, तो उसमें से चार आतंकी बाहर निकले। वह गेट बंद करने के लिए दौड़ी। हालांकि इस दौरान वह वायरलैस सैट पर कंट्रोल रूम को सूचना भी दे रही थी। दोबारा से अपनी पिकेट पर पहुंचने के बाद कमलेश ने आसपास के जवानों को चेताया।
कमलेश के पति अवधेश सिंह कन्नौज में पैट्रोल पंप चलाते हैं, उन्होंने बताया कि जैसे ही उसकी दोनों बेटियां टीवी पर संसद भवन देखती हैं, तो आंखें भर आती हैं। जब उसकी बेटियों को पता चला कि उनकी मां को 11 गोलियां लगी थीं, तो वे थोड़ा उदास हो जाती हैं। अपनी मां के बलिदान पर उन्हें नाज है।
कमलेश के परिवार को जब मालूम हुआ कि संसद भवन हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के पास दया याचिका लगाई है, तो उन्होंने इसके विरोध में अशोक चक्र वापस लौटाने की धमकी दी थी। उनका कहना था कि संसद हमले के दोषी को बख्शा नहीं जा सकता।