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संसद भवन हमले में 11 गोलियां लगने के बाद भी कमलेश के हाथ से नहीं छूटा था वायरलेस सेट

Fri, 13 Dec 2019 03:39 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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13 December Parliament attack 17th anniversary - फोटो : ani
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संसद भवन पर हमले के दौरान सबसे पहले आतंकियों का सामना सीआरपीएफ की 88 महिला बटालियन की सदस्य कमलेश से हुआ था। उनके हाथ में केवल एक वायरलैस सैट था। आतंकियों की 11 गोलियां लगने के बाद भी न तो उसके हाथ से वायरलेस सेट छूटा और न ही जुबान बंद हुई। सबसे पहले हमले की सूचना उसने ही कंट्रोल रूप को दी थी। कमलेश को मरणोपरांत अशोक चक्र प्रदान किया गया।  

 

13 फरवरी 2001 को सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर कमलेश कुमारी संसद भवन परिसर के गेट नंबर 12 के स्केनर पर तैनात थी। उसने देखा कि विजय चौक से एक कार जिस पर गृह मंत्रालय और संसद भवन का स्टीकर लगा हुआ था, गेट नंबर 12 की तरफ आ रही है। जैसे ही वह कार निकट पहुंची, तो उसमें से चार आतंकी बाहर निकले। वह गेट बंद करने के लिए दौड़ी। हालांकि इस दौरान वह वायरलैस सैट पर कंट्रोल रूम को सूचना भी दे रही थी। दोबारा से अपनी पिकेट पर पहुंचने के बाद कमलेश ने आसपास के जवानों को चेताया।

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तभी उसकी नजर मानव बम पर पड़ी। जैसे ही उसने यह सूचना कंट्रोल रूम को दी, उसी वक्त गेट नंबर 11 की ओर से कई आतंकी उसकी तरफ आ रहे थे। हाथ में वायरलैस सैट लिए वह पिकेट से बाहर निकली। उसी दौरान आतंकियों ने उस पर लगातार गोलियों बौछार कर दी। उसकी सूचना पर ही सीआरपीएफ ने सारा घटना क्रम समझकर आतंकियों को ढेर किया था।

संसद भवन देखते ही भर आती हैं आंखें

कमलेश के पति अवधेश सिंह कन्नौज में पैट्रोल पंप चलाते हैं, उन्होंने बताया कि जैसे ही उसकी दोनों बेटियां टीवी पर संसद भवन देखती हैं, तो आंखें भर आती हैं। जब उसकी बेटियों को पता चला कि उनकी मां को 11 गोलियां लगी थीं, तो वे थोड़ा उदास हो जाती हैं। अपनी मां के बलिदान पर उन्हें नाज है।

अशोक चक्र वापस लौटाने की धमकी दी थी

कमलेश के परिवार को जब मालूम हुआ कि संसद भवन हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के पास दया याचिका लगाई है, तो उन्होंने इसके विरोध में अशोक चक्र वापस लौटाने की धमकी दी थी। उनका कहना था कि संसद हमले के दोषी को बख्शा नहीं जा सकता।

 

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