विश्वविद्यालयों में नियुक्ति के लिए 13 प्वाइंट रोस्टर की जगह 200 प्वाइंट रोस्टर व्यवस्था बहाल करने से संबंधित केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (शिक्षक संवर्ग आरक्षण) बिल को लोकसभा में सोमवार को मंजूरी मिल गई। कांग्रेस ने इस मामले में अध्यादेश लाने का विरोध करते हुए विस्तृत विमर्श केलिए इसे स्थाई समिति में भेजने की मांग की तो अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने कांग्रेस को खरी खरी सुनाई। उच्च सदन की मंजूरी मिलते ही विश्वविद्यालयों में नियुक्ति केलिए पुरानी व्यवस्था बहाल हो जाएगी। इसके साथ ही शिक्षक संवर्ग में 7000 रिक्तियों को भरे जाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
गौरतलब है कि इलाहाबाद ने नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय/कॉलेज की जगह विभाग को यूनिट मानने का फैसला दिया था। इस फैसले को आरक्षण नीति के खिलाफ बताते हुए एससी-एसटी और पिछड़ा वर्ग ने तीखा विरोध किया था। चुनाव से पहले विवाद को टालने के लिए सरकार ने इस फैसले पर रोक केलिए अध्यादेश का सहारा लिया था। अब नई व्यवस्था में इस बिल को दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद 7000 रिक्त पदों को भरे जाने के क्रम में सामान्य वर्ग के गरीबों को भी 10 फीसदी का लाभ मिलेगा।
कांग्रेस बोली स्थाई समिति को भेजें बिल
इस बिल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले सरकार ने महज वोट केलिए अध्यादेश का उपयोग किया। इस बिल में व्यापक विमर्श की जरूरत बताते हुए चौधरी ने इसे संसद की स्थाई समिति को भेजने की मांग की। इस दौरान अधीर ने इस बिल पर व्यापक विचार विमर्श नहीं करने का आरोप लगाया।
अनुप्रिया बोली कांग्रेस ने किया गुमराह
अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल ने बिल का स्वागत करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 55 साल सत्ता में रही, मगर आरक्षण के प्रति ईमानदारी न दिखाने के कारण ही आज तक एससी-एसटी और ओबीसी का सरकारी नौकरियों में बैकलॉग नहीं भरा गया। उन्होंने कहा कि आज भी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इन वर्गों की भागीदारी लगभग नगण्य है। उन्होंने बैकलॉग भरने के लिए ईमानदार प्रयास की नसीहत भी दी।
किसी के साथ अन्याय नहीं- निशंक
मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि वंचित वर्ग के आरक्षण के अधिकार की रक्षा जरूरती थी। यही कारण है कि सरकार ने अन्याय न होने देने के लिए बिल से पहले अध्यादेश का सहारा लिया। निशंक ने कहा कि सबका साथ सबका विकास ही इस सरकार की नीति है। सरकार इनके संविधान प्रदत्त अधिकारों की हर हाल में रक्षा करेगी।