भारत ने आखिरकार तमाम मुश्किलों के बीच डोमिनिक रिपब्लिक के पास दो लाख हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन टैबलेट्स भिजवाने में कामयाबी पा ली है। डॉमिनिक रिपब्लिक ने भारत से इन आपातकालीन दवाओं को भेजने के लिए 25 मार्च को ही क्यूबा के भारतीय उच्चायोग के जरिये ये अनुरोध किया था।
कोरोना से बुरी तरह प्रभावित डोमिनिक के राजदूत हैंस डेनेनबर्ग ने भी नई दिल्ली में इसके लिए विदेश मंत्रालय से 29 मार्च को ही बात की थी। बाद में भारत सरकार ने ये दवाएं वहां भिजवाने का फैसला किया।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस जरूरी कंसाइनमेंट को भेजने में इस लॉकडाउन के दौरान विदेश मंत्रालय को कितनी मुश्किलें उठानी पड़ीं। मंत्रालय ने इस कंसाइनमेंट के अटलांटा तक भेजने की पूरी कहानी सामने रखी है।
मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक इन दो लाख एचसीक्यू टैबलेट्स का कंसाइनमेंट 13 अप्रैल को मेसर्स एचएलएल के वेयरहाउस में दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा।
विदेश मंत्रालय ने इस कंसाइनमेंट को भिजवाने के लिए तमाम कूरियर कंपनियों से संपर्क किया, लेकिन 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती की छुट्टी और लॉकडाउन की वजह से किसी भी कूरियर कंपनी से कोई संपर्क नहीं हो सका।
मंत्रालय पूरे दिन लगातार कोशिशें करता रहा लेकिन न तो किसी कंपनी ने फोन उठाया न मैसेज का जवाब दिया।
बड़ी मुश्किल से मंत्रालय का संपर्क डीएचएल के एक प्रतिनिधि से हुआ, लेकिन उसने भी यही बताया कि लॉकडाउन के दौरान उनके यहां किसी कंसाइनमेंट को लाने ले जाने पर पूरी तरह रोक है।
मंत्रालय ने तमाम विकल्प तलाशे और यह भी कोशिश की गई कि किसी तरह ये दवाएं न्यूयॉर्क के पीएमआई तक पहुंच सकें ताकि वहां से इन्हें डोमिनिक रिपब्लिक तक पहुंचाया जा सके। लेकिन यह भी संभव नहीं हो सका।
फिर यह कोशिश की गई कि ब्राजील का जो विमान अपने नागरिकों को वापस लेने आया है, उसी से यह कंसाइनमेंट भेजा जा सके, लेकिन वह भी संभव नहीं हो सका। ये विमान 14 अप्रैल को दिल्ली से ब्राजील के साओ पाओलो रवाना होने वाला था।
आखिरकार विदेश मंत्रालय को डेल्टा कार्गो विमान (डीएल8875) का पता चला जो 15 अप्रैल को मुंबई से अटलांटा (अमेरिका) के लिए रवाना होने वाला था। लेकिन मंत्रालय के सामने अब बड़ी चुनौती थी कि कंसाइनमेंट को दिल्ली से मुंबई कैसे लाया जाए।
कोशिश की गई कि एचएलएल दवाइयों का नया कंसाइनमेंट मुंबई में उपलब्ध करवा दे, लेकिन वह भी संभव नहीं हो पाया। हालांकि एचएलएल ने कोशिश की कि अहमदाबाद से दवाएं उपलब्ध करवाकर किसी तरह मुंबई भेजी जा सकें, लेकिन इतने कम वक्त में यह भी संभव नहीं हो पाया।
फिर किसी तरह ब्लूडार्ट की एक फ्लाइट से ये कंसाइनमेंट 15 अप्रैल को दिल्ली से मुंबई मंगवा कर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ओडिसी लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिये पहुंचाया जा सका।
फिर मुंबई में कस्टम क्लियरेंस के बाद इसे अटलांटा भेजने में कामयाबी मिली और मंत्रालय के मुताबिक ये कंसाइनमेंट आखिरकार 16 अप्रैल की सुबह अटलांटा पहुंच सका। यानी डोमिनिक रिपब्लिक को भेजी जाने वाली ये मदद उसके अनुराध करने के 21 दिन बाद वहां तक पहुंच सकी।