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चिंताजनक: देश में प्रसव बाद 20 फीसदी महिलाओं को अवसाद, अध्ययन में खुलासा- ज्यादातर महिलाएं इस बीमारी से अनजान

Tue, 23 Apr 2024 07:09 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

दरअसल, दुनियाभर में मातृ मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं में से एक माना जा रहा है, क्योंकि यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
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women - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में हर पांच में से एक (20 फीसदी) गर्भवती या फिर प्रसव बाद महिला अवसाद की शिकार हो रही है। इसके बावजूद देश की हर दूसरी महिला इस बीमारी से अन्जान है। साथ ही महिलाओं को प्रसवोत्तर अवसाद (पीपीडी) बीमारी के बारे में भी पता नहीं है। यह जानकारी केंद्र सरकार के बंगलूरू स्थित निम्हांस संस्थान के विशेषज्ञों ने साझा की है।

मेडिकल जर्नल प्लस वन में प्रकाशित इस अध्ययन को नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अनुमति दी है। इस सरकारी अध्ययन में यह भी पता चला है कि जब महिलाएं अपने शिशु को लेकर टीकाकरण केंद्रों पर पहुंचती हैं तो वहां मौजूद अन्य महिला या स्वास्थ्य कर्मचारी के साथ बातचीत में अपने लक्षणों के बारे में चर्चा करती हैं, लेकिन वह तब भी अपनी परेशानी समझ नहीं पाती हैं। इसलिए जरूरी है कि देश के सभी टीकाकरण केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ बीमारी के बारे में जानकारी साझा की जाए।

मां और बच्चे दोनों पर असर

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दरअसल, दुनियाभर में मातृ मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं में से एक माना जा रहा है, क्योंकि यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, साल 2022 में भारत में प्रसवोत्तर अवसाद यानी पीपीडी 22 फीसदी महिलाएं ग्रस्त मिली हैं, जिनमें से अधिकतर पहले या दूसरे शिशु को जन्म देने के बाद अनावश्यक बातों को लेकर भी तनाव लेने से संबंधित परेशानियों से घिरी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक परिणामों से बचने के लिए प्रसवोत्तर अवसाद का शीघ्र निदान करना और पर्याप्त रूप से प्रबंधन करना बहुत जरूरी है।

वैज्ञानिक तथ्यों से बनाया 13 मिनट का वीडियो
निम्हांस के मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के प्रो. सुंदर नाग गंजेकर ने बताया कि इस अध्ययन के जरिये वैज्ञानिक तथ्यों को जुटा कर साधारण भाषा में एक 12 से 13 मिनट का वीडियो बनाया है। इस वीडियो को देश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और टीकाकरण केंद्रों पर क्षेत्रीय भाषा में प्रसारित करना चाहिए, ताकि यहां आने वाली महिलाओं को उनकी परेशानी, लक्षण, इलाज और जांच के बारे में सही जानकारी मिल सके।  

जब कई बदलावों से गुजरती है मां

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प्रो. गंजेकर ने कहा, गर्भावस्था के दौरान एक महिला कई शारीरिक, भावनात्मक, हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलावों से गुजरती है। एक मां शिशु को जन्म देने के बाद उत्साह और खुशी से लेकर दुख और आंसुओं तक कई तरह की भावनाओं को महसूस कर सकती है, जिसके बारे में कल्पना कर पाना काफी मुश्किल है।

 

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