साल 1962, जब चीन और भारत के बीच भयावह युद्ध चल रहा था। यह युद्ध एक महीने तक चला। युद्ध की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध में चीन की ओर से करीब 80 हजार जवान लड़ने के लिए मौजूद थे। वहीं भारत की ओर से उनका मुकाबला करने के लिए महज 10-20 हजार जवान ही थे। लेकिन बावजूद इसके हमारे जवानों ने उनका मुकाबला पूरी निडरता से किया।
आज 18 नवंबर है, यानि वो दिन जब रेजांगला युद्ध हुआ था। यह युद्ध रेजांग ला के एक दर्रे पर हुआ, जहां से चुशूल की घाटी में प्रवेश मिलता है। यहां 17-18 नवंबर, 1962 को मेजर शैतान सिंह की छोटी सी टुकड़ी मौजूद थी। चीन के मुकाबले भारत के पास सैनिक तो कम थे ही, साथ ही गोला बारूद भी काफी कम संख्या में मौजूद था। लेकिन अगर हौसले की बात करें तो उसमें भारत आगे था। यहां भारतीय जवानों के आगे चीन की बड़ी सेना भी कमजोर पड़ गई थी। यह स्थान समुद्र तल से 5,000 मीटर (16,000 फीट) की ऊंचाई पर स्थित था।