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कोरोना से जंग में 196 डॉक्टरों ने गंवाई जान, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में हुईं सबसे ज्यादा मौतें

Sat, 08 Aug 2020 07:40 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • ज्यादातर डॉक्टर कोरोना मरीजों की देखभाल करते, संवेदनशील वातावरण में रहने के कारण हुए कोरोना संक्रमित       
  • एम्स अस्पताल के 600 स्वास्थ्यकर्मी और उनके 700 परिवार के लोग भी हुए संक्रमित    
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एक शख्स के स्वैब का नमूना एकत्र करती महिला स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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कोरोना के कारण देश में अब तक 42,626 लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना के सामान्य मरीजों के साथ-साथ उनका इलाज करने वाले डॉक्टर भी इसकी चपेट में आए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक कोरोना के कारण अब तक 196 डॉक्टरों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसमें सबसे ज्यादा 43 डॉक्टर तमिलनाडु से हैं।

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इसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र दोनों से 23-23 डॉक्टर, बिहार के 19, पश्चिम बंगाल के 16 और उत्तर प्रदेश के 11 डॉक्टरों को कोरोना के कारण मौत के मुंह में समा गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में अन्य राज्यों से बेहतर माने जाने वाली दिल्ली में भी 12 डॉक्टरों की कोरोना के कारण जान गई है।
 
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के ओनरेरी सेक्रेटरी जनरल आरवी अशोकन ने अमर उजाला से कहा कि मरने वाले अनेक डॉक्टर कोरोना मरीजों की देखभाल के दौरान संक्रमित हुए थे, जबकि कई को अस्पताल के संवेदनशील वातावरण में रहने के दौरान संक्रमण हुआ था।
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उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किसी एक नीति का न होना भी इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार हो सकता है क्योंकि मरीजों की देखभाल के दौरान अलग-अलग स्टैंडर्ड अपनाए गये थे।

एम्स जैसे अस्पताल में भी कोरोना की भेंट चढ़े स्वास्थ्यकर्मी 

स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सबसे अच्छे माने जाने वाले दिल्ली एम्स अस्पताल में भी अनेक स्वास्थ्य कर्मी कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। अस्पताल के 600 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी और लगभग 700 के लगभग उनके परिवार के लोग भी अब तक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। एम्स की कैंटीन में काम करने वाले कर्मचारी की मौत भी कोरोना के कारण हो चुकी है।

मास्क और पीपीई किट्स की गुणवत्ता पर भी उठे थे सवाल 

ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के आलावा मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने भी उन्हें दिए जा रहे मास्क और पीपीई किट्स की क्वालिटी को लेकर सवाल उठाए थे। डॉक्टरों का कहना था कि पूरी तरह सुरक्षा रखने के बाद भी उनके साथ कोरोना की चपेट में आ रहे हैं, इसके पीछे एक बड़ी वजह पीपीई किट्स और मास्क की घटिया क्वालिटी हो सकती है। इस सवाल के बाद कुछ विशेष कंपनियों के मास्क, पीपीई किट्स पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया था।

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