मुंबई में कानून की पढ़ाई करने वाली 19 साल की एक लड़की ने हाईकोर्ट में याचिका दायर अपने प्यार के लिए सुरक्षा की मांग की है। लड़की की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुणे पुलिस को निर्देश दिया कि वह 19 वर्षीय कानून की छात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उसके उन आरोपों पर गौर करे कि दूसरी जाति के युवक से संबंध रखने पर उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। याचिकाकर्ता ने अपने वकील नितिन सतपुते के जरिए अदालत में गुहार लगाई थी।
न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक और न्यायमूर्ति आर आई चागला की अवकाश पीठ ने पुणे में तालेगांव एमआईडीसी पुलिस को निर्देश दिया कि वह लड़की की शिकायत को देखे और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये उचित कदम उठाए। कानून की दूसरे साल की छात्रा ने अपनी याचिका में कहा कि वह मराठा समुदाय से आती है जबकि अपने साथ पढ़ने वाले जिस लड़के से वह प्रेम करती है वह मातंग समुदाय से आता है जिसे राज्य में अनुसूचित जाति का माना जाता है।
लड़की की याचिका के मुताबिक उसका प्रेमी गरीब परिवार से है और उसके माता-पिता इस अंतरजातीय रिश्तों के खिलाफ हैं और धमकी दे रहे हैं कि अगर उसने लड़के से मिलना जारी रखा तो वे उन दोनों को मार देंगे। लड़की ने आरोप लगाया कि उसके माता-पिता उसे प्रताड़ित कर रहे हैं और इस साल फरवरी में इससे परेशान होकर उसने कुछ दवाएं खाकर खुदकुशी की भी कोशिश की थी।
लड़की ने आगे कहा, घर वालों द्वारा प्रताड़ित करने के बाद मैं घर से भाग गई। पुलिस से भी कोई मदद नहीं मिल रही थी, इसलिए मैंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उसके वकील नितिन ने बताया कि लड़की अनुसूचित जाति के एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में है जिसको उसके परिवार वालों ने मंजूरी नहीं दी।