बता दें कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2004 से राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) लागू की थी। इसका मतलब, जो भी कर्मचारी एक जनवरी 2004 या उसके बाद सेवा में आए हैं, वे पुरानी पेंशन व्यवस्था में नहीं, बल्कि एनपीएस के दायरे में आएंगे। राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा और सदस्य सी. श्रीकुमार, कई बार वित्त मंत्रालय एवं डीओपीटी के अधिकारियों के समक्ष पुरानी पेंशन व्यवस्था को दोबारा से लागू करने की मांग कर चुके हैं।
एक जनवरी 2004 के बाद सेना को छोड़कर बाकी सभी केंद्रीय विभागों में एनपीएस लागू किया गया था। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी 'पुरानी पेंशन व्यवस्था' से बाहर कर दिया गया। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव, रणबीर सिंह इस बाबत केंद्र सरकार में कई मंत्रियों को ज्ञापन दे चुके हैं। बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों में मौजूदा वेतन भत्तों को लेकर जवान खुश नहीं हैं। भारतीय सेना को तो 'वन रैंक वन पैंशन' भी दे दिया गया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन भी नहीं दी जा रही।
केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) को लेकर एक नई व्यवस्था जारी की है। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक, सभी सुसंगत पहलुओं पर विचार करने के बाद तथा आगे होने वाली मुकदमेबाजी को कम करने के लिए, एक अहम निर्णय लिया गया है। ऐसे सभी मामलों में जहां दिनांक 31 दिसंबर 2003 को या उससे पूर्व होने वाली रिक्तियों के सापेक्ष भर्ती के परिणाम एक जनवरी 2004 से पहले घोषित किए गए थे, भर्ती के लिए सफल घोषित उम्मीदवार पुरानी पेंशन योजना यानी केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के अधीन कवर किए जाने के पात्र होंगे।