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राहत: पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में आए 'सीआरपीएफ' के 163 कर्मी, जीपीएफ नंबर अलॉट करने का आदेश

सार

केंद्र सरकार ने जनवरी 2004 से राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) लागू की थी। इसका मतलब, जो भी कर्मचारी एक जनवरी 2004 या उसके बाद सेवा में आए हैं, वे पुरानी पेंशन व्यवस्था में नहीं, बल्कि एनपीएस के दायरे में आएंगे...
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सीआरपीएफ जवान - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के 163 कर्मी, जिनमें सिपाही से लेकर निरीक्षक तक शामिल हैं, उन्हें पुरानी पेंशन व्यवस्था का फायदा मिलेगा। बल मुख्यालय ने गत सप्ताह यह आदेश जारी किया है। इन सभी कर्मियों का मौजूदा 'राष्ट्रीय पेंशन स्कीम' (एनपीएस) खाता बंद कर उसकी जगह पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत उन्हें जीपीएफ खाता संख्या अलॉट कर दिया जाएगा। सीआरपीएफ में नौ कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर 163 कर्मियों को केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के अधीन कवर किए जाने के योग्य पाया है।

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सीआरपीएफ में जिन कर्मियों को ओपीएस का फायदा मिलेगा, वे बल महानिदेशालय, कोबरा सेक्टर, आरएएफ सेक्टर और कई दूसरे जोन में तैनात हैं। बहुत से कर्मी ऐसे भी हैं, जिन्हें कंपेंनसेट अपाइंटमेंट आधार पर ओपीएस दिया जाएगा। आईजी (प्रशासन) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, बीएसएफ कर्मी परमानंद यादव और राजेंद्र सिंह इस बाबत दिल्ली हाईकोर्ट में चले गए थे। उनका कहना था कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया दिसंबर 2003 में पूरी हो गई थी। नियुक्ति पत्र एक जनवरी 2004 के बाद जारी किया है। इसमें उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं है। ये विभागीय लापरवाही का मामला है। ऐसे में उन्हें एनपीएस की बजाए ओपीएस में शामिल किया जाए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी लेने के बाद सीआरपीएफ में दस कमेटियों को यह मामला सौंपा गया। सभी जोन के अधिकारियों से कहा गया कि वे अपना रिकार्ड चैक करें। यदि उनके यहां भी ऐसा कोई मामला हो तो उसकी फाइल प्रस्तुत करें। एक कमेटी राजपत्रित अधिकारियों के लिए और नौ कमेटियां गैर-राजपत्रित कर्मियों के लिए बनाई गईं। अब सभी नौ कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उसी आधार पर सीआरपीएफ कर्मियों को एनपीएस से बाहर निकालकर उन्हें ओपीएस में शामिल कर दिया जाएगा।

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बता दें कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2004 से राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) लागू की थी। इसका मतलब, जो भी कर्मचारी एक जनवरी 2004 या उसके बाद सेवा में आए हैं, वे पुरानी पेंशन व्यवस्था में नहीं, बल्कि एनपीएस के दायरे में आएंगे। राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा और सदस्य सी. श्रीकुमार, कई बार वित्त मंत्रालय एवं डीओपीटी के अधिकारियों के समक्ष पुरानी पेंशन व्यवस्था को दोबारा से लागू करने की मांग कर चुके हैं।

एक जनवरी 2004 के बाद सेना को छोड़कर बाकी सभी केंद्रीय विभागों में एनपीएस लागू किया गया था। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी 'पुरानी पेंशन व्यवस्था' से बाहर कर दिया गया। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव, रणबीर सिंह इस बाबत केंद्र सरकार में कई मंत्रियों को ज्ञापन दे चुके हैं। बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों में मौजूदा वेतन भत्तों को लेकर जवान खुश नहीं हैं। भारतीय सेना को तो 'वन रैंक वन पैंशन' भी दे दिया गया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन भी नहीं दी जा रही।

केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) को लेकर एक नई व्यवस्था जारी की है। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक, सभी सुसंगत पहलुओं पर विचार करने के बाद तथा आगे होने वाली मुकदमेबाजी को कम करने के लिए, एक अहम निर्णय लिया गया है। ऐसे सभी मामलों में जहां दिनांक 31 दिसंबर 2003 को या उससे पूर्व होने वाली रिक्तियों के सापेक्ष भर्ती के परिणाम एक जनवरी 2004 से पहले घोषित किए गए थे, भर्ती के लिए सफल घोषित उम्मीदवार पुरानी पेंशन योजना यानी केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के अधीन कवर किए जाने के पात्र होंगे।
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