स्वतंत्रता दिवस पर बीएसएफ के उन 16 जांबाजों को वीरता पदक से सम्मानित किया गया है, जिन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान को करार जवाब दिया था। 'ऑपरेशन सिंदूर' में बहादुर सीमा प्रहरियों द्वारा प्रदर्शित अदम्य साहस और बेजोड़ वीरता का यह उचित ही प्रतिफल है। इसके अतिरिक्त, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम), ऐसे पांच पदक बीएसएफ कार्मिकों को मिले हैं। उत्कृष्ट सेवा के लिए पदक (एमएसएम), 46 बीएसएफ अधिकारियों और कर्मियों को प्रदान किए गए हैं।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान की कार्रवाई के जवाब में, 120 बटालियन बीएसएफ के एएसआई (जीडी) उदय वीर सिंह ने 10 मई 2025 को जम्मू सेक्टर के बीओपी जबोवाल पर एक भारी हमले के दौरान अनुकरणीय साहस का परिचय दिया। दुश्मन की भीषण गोलाबारी के बीच, उन्होंने एक पाकिस्तानी निगरानी कैमरे को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया, जिससे बीओपी और सैनिकों की गतिविधियों की वास्तविक समय पर निगरानी करना मुश्किल हो गया। एचएमजी गोलाबारी से उनके ऊपरी होंठ पर जानलेवा छर्रे लगने के बावजूद, उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया और दुश्मन से भिड़ते रहे। दुश्मन के एचएमजी ठिकानों को निष्क्रिय कर दिया गया। उनके कार्यों ने भारत की ओर से निर्बाध प्रभुत्व सुनिश्चित किया। उन्होंने अपने साथी सैनिकों को प्रेरित किया। बाद में उनका जम्मू के सैन्य अस्पताल में इलाज हुआ। उन्होंने ड्यूटी पर लौटने की अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त की। उनके वीरतापूर्ण कार्य के सम्मान में, उन्हें 'वीरता पदक' से सम्मानित किया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर (7-8 मई 2025) के तहत भारत के सटीक हमलों के बाद, पाकिस्तान ने जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ चौकियों पर भारी गोलीबारी की। ड्रोन हमले भी हो रहे थे। 09-10 मई 2025 की रात को, पाकिस्तानी सैनिकों ने 165 बीएन बीएसएफ के बीओपी करोटाना खुर्द, करोटाना फॉरवर्ड और सुचेतगढ़ पर एक समन्वित हमला किया। ये पोस्ट पाकिस्तानी चौकियों- जमशेद मलाने और कसीरा से 82 मिमी मोर्टार और मशीन गन की भीषण आग की चपेट में आ गए। बीएसएफ के जवानों ने सटीक गोलीबारी से जवाबी कार्रवाई की। 10 मई को सुबह साढ़े 7 बजे, बीओपी करोटाना खुर्द ने एजीएस गोला-बारूद की गंभीर कमी की सूचना दी। एएसआई (जीडी) राजप्पा बीटी और सीटी (जीडी) मनोहर ज़ालक्सो को गोला-बारूद की फिर से आपूर्ति करने का काम सौंपा गया। एएसआई राजप्पा को छर्रे लगने से घातक चोटें आईं, और सीटी ज़ालक्सो के दाहिने हाथ में भी चोट आई। चोटों के बावजूद, दोनों ने अपने अत्यधिक जोखिम भरे मिशन में सफलतापूर्वक भाग लिया। वीरतापूर्ण कार्य के सम्मान में, उन्हें 'वीरता पदक' से सम्मानित किया गया है।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के जवाब में, 53वीं बटालियन बीएसएफ के सहायक कमांडेंट आलोक नेगी ने कांस्टेबल (जीडी) कंदर्प चौधरी और वाघमारे भवन देवराम के साथ मिलकर 7 से 10 मई 2025 तक एफडीएल मुखयारी में दुश्मन की भीषण गोलाबारी के दौरान असाधारण साहस का परिचय दिया। दुश्मन की लगातार गोलाबारी और एमएमजी गोलाबारी के बीच, आलोक नेगी, एसी ने गोलाबारी के बीच रक्षात्मक कार्रवाई का नेतृत्व किया, कर्मियों और मोर्टार हथियारों को फिर से तैनात किया। प्रमुख दुश्मन चौकियों पर सटीक जवाबी हमलों का समन्वय किया। कांस्टेबल चौधरी और वाघमारे, जो क्रमशः मोर्टार डिटैचमेंट 1 और 2 की कमान संभाल रहे थे, ने 48 घंटे से अधिक समय तक लगातार और सटीक गोलाबारी की, जिससे दुश्मन की स्थितियाँ काफी हद तक कुंद हो गईं। उनके निडर आचरण ने शून्य हताहत सुनिश्चित किया और परिचालन प्रभुत्व बनाए रखा। उनके वीरतापूर्ण कार्य के सम्मान में, अधिकारी को 'वीरता पदक' से सम्मानित किया गया है।