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महात्मा गांधी की 150वीं जयंती, चीन की क्रांति के 100 साल, जानें और क्या खास होगा 2019 में

Sat, 29 Dec 2018 12:42 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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2019
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नया साल आने में महज कुछ दिन ही बचे हैं। साल 2018 कई बातों के लिए याद किया जाएगा। इस साल ऐसी कई घटनाएं भी हुईं जिन्होंने इतिहास की किताब में अपनी जगह बना ली। अब बात करते हैं आने वाले साल की। 2019 कई मामलों में 2018 से भी अधिक यादगार होने वाला है। इतिहास में घटी कई घटनाओं को इस साल याद किया जाएगा। जहां भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई जाएगी, वहीं चीन में हुई क्रांति के 100 साल पूरे होंगे। तो चलिए जानते हैं, और क्या खास होगा 2019 में-
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महात्मा गांधी

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mahatma gandhi
भारत में इस साल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई जाएगी। इसे भारत सरकार हर साल बड़े धूमधाम से मनाती है। इस दिन पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश भी होता है। गांधीजी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अमूल्य योगदान दिया था। चाहे फिर किसानों की बात करें या फिर खादी की उन्होंने अंहिसा के रास्ते पर चलते हुए कई बड़ी जीत हासिल की।

किसानों के लिए उन्होंने कई आंदोलन चलाए और अंग्रेजों की अमानवीय नीतियों को नीचे झुका दिया। भारतीय बाजार और छोटो कामगारों की स्थिति बेहतर हो सके, इसके लिए उन्होंने खादी का प्रचार प्रसार किया। इसके महत्व से लोगों को अवगत कराया। आज भी पूरी दुनिया में खादी की एक विशेष जगह बनी हुई है। भारत को उसकी उन्नत खादी के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। वहीं 2019 में गांधीजी की पत्नी की 75वीं पुण्यतिथि भी है। इस दिन को कस्तूरबा दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
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दलाई लामा

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2019
भारत और चीन के रिश्तों की बात हो और दलाई लामा का जिक्र न हो, ऐसा कभी हो ही नहीं सकता। भारत और चीन के रिश्तों में खटास की एक वजह दलाई लामा भी बने थे जिन्हें भारत ने शरण दी थी। साल 1959 को तिब्बत में विद्रोह हुआ था। 

इस विद्रोह को मार्च में 60 साल पूरे होने वाले हैं। इस दौरान काफी संघर्ष और दंगे हुए। इस दौरान तिब्बत की राजधानी ल्हासा में मार्शल लॉ लगा दिया गया था। जिससे दलाई लामा भारत आने को मजबूर हो गए।

लियोनार्दो दा विंची

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lonardo
2 मई को इटली के मशहूर चित्रकार लिओनार्दो दा विंची की 500वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी। सन 1452 में जन्में लिओनार्दो दा विंची इटली के मशहूर चित्रकारों में से एक थे। लियोनार्दो दा विंची ने दुनियाभर में चर्चित पेंटिंग 'मोना लीसा' सहित अनगिनत पेंटिग्स बनाई थीं। लेकिन मोना लीसा की पेंटिग को आज भी खूबसूरती की बेमिसाल अभिव्यक्ति माना जाता है। इस पेंटिंग के बारे में दुनियाभर के लोग जानते हैं।

सबसे खास बात ये है कि साल 1519 में अपनी मौत से पहले विंची ने एक जर्नल लिखा था। इसमें उन्होंने टैबलेट, इंटरनेट, मोबाइल फोन और ड्रोन आदि की कल्पना की थी। हैरानी की बात तो ये है कि उस समय में ऐसा कोई आविष्कार ही नहीं हुआ था। 
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चीन की क्रांति

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chinese movement - फोटो : reddit.com
अगले साल 4 मई को चीन की क्रांति को 100 साल पूरे हो जाएंगे। इस दिन बीजिंग के थियानमैन चौक पर हजारों छात्रों ने साम्राज्यवादियों के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। उस दौरान छात्रों ने सड़कों पर नारे लगाते हुए देश में लोकतंत्र और विज्ञान की प्रगति की मांग की थी। चीनी समाज में तभी आधुनिकता का जन्म हुआ। 

इसी आंदोलन से 1921 में चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का भी जन्म हुआ। चीनी समाज से सामंतवाद का अंत हुआ और माओवाद बनाम मार्क्सवाद की शुरुआत हुई। छात्रों के उस आंदोलन को आज भी याद किया जाता है। उस दिन की याद में चीनी में जगह-जगह जलसे और समारोह का आयोजन किया जाता है।
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ब्लूटूथ

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Bluetooth
आज हर कोई ब्लूटूथ का इस्तेमाल करता है। इसका इस्तेमाल वीडियो, गाने आदि शेयर करने के लिए किया जाता है। 2019 में ब्लूटूथ की 20वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। इसकी शुरुआत 1999 में ब्ल्यूटूथ स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप ने की थी। यह पांच कंपनियों का समूह है। इससे शेयरिंग 'शॉर्ट-रेंज रेडियो सिग्नल' के माध्यम से की जाती है। 

यूं तो आजकल हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल करता है और शेयरिंग के लिए शेयरिट, व्हाट्सएप और मैसेंजर को पसंद करता है। लेकिन अगर इंटरनेट न हो तो भी ब्लूटूथ का इस्तेमाल किया जा सकता है। अब फोन के अलावा लैपकॉप, स्पीकर में भी ब्लूटूथ आने लगा है। 
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यूरो

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यूरो
यूरोप की मुद्रा यूरो को जनवरी, 2019 में लागू हुए 20 साल पूरे हो जाएंगे। जब ये मुद्रा लागू हुई थी तो कुछ लोगों ने आशंका जताई थी कि ये अधिक समय तक टिक नहीं पाएगी। लेकिन वो गलत साबित हुए। हालांकि भविष्य में इस मुद्रा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। 

यह मुद्रा यूरोपियन यूनियन के 28 देशों में से 19 की आधिकारिक मुद्रा है। इनमें आस्ट्रिया, बेल्जियम, साइप्रस, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, लग्जम्बर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्लोवाकिया और स्पेन (2014) शामिल हैं।  इसके अलावा पांच अन्य यूरोपीय देशों में आधिकारिक सहमति या बिना सहमति के भी यह प्रचलन में है। 

नाटो

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nato
अप्रैल, 2019 में 29 देशों के सबसे ताकतवर संगठन नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) को 70 साल पूरे हो जाएंगे। यह इतिहास का सबसे बड़ा, मजबूत और स्थायी संगठन है। साल 2014 में रूस के यूक्रेन पर हमले और क्रीमिया पर कब्जे के बाद नाटो में बदलाव हुआ है।

इसी साल इस संगठन को नया ऑफिस भी मिला है। इसे ग्लास और स्टील पैलेस भी कहा जा रहा है। 12 साल में बने इस ऑफिस पर 9 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें 29 देशों के दूतावास एक साथ काम करेंगे। 

बता दें 1949 में स्थापित नाटो का मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में है। इसके सदस्य देशों पर अगर कोई बाहरी हमला होता है तो उस समय यह संगठन उस देश की सहायता करता है। वहीं विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए संगठन की साल में एक बार बैठक होती है।
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