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50 फीसदी लक्ष्य पूरा करने में 15 फीसदी टीका बर्बाद, हर दिन बढ़ रही संख्या

Mon, 01 Feb 2021 05:19 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन लगातीं स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारियों में डर और भ्रांतियों की वजह से सरकार को काफी नुकसान हुआ है। टीकाकरण शुरू होने के दो सप्ताह में करीब 15 फीसदी टीके  की खुराक बर्बाद हो गईं। ऐसा इसिलए क्योंकि तय संख्या कर्मचारी टीका लेने के लिए आगे नहीं आए जिसकी वजह से वायल में बची शेष खुराक चंद घंटों बाद किसी के लायक ही नहीं बचीं।

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अभी तक इस पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आ रही थी लेकिन अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ही आंकड़ों से पता चला है कि देश में टीकाकरण के शुरुआती दिनों तक 10 फीसदी खुराक बर्बाद होने की जानकारी अब तक सामने आ चुकी है। जबकि पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों को शामिल कर लिया जाए तो यह 15 फीसदी के आसपास है।

बीते एक सप्ताह की स्थिति पर गौर करें तो रोजाना अपने लक्ष्य के 50 फीसदी टीकाकरण तक पहुंचने में कामयाबी जरूर मिली है लेकिन काफी टीके बर्बाद भी हुए हैं जिनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
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अगर गणितीय आकलन देखें तो अब तक डोज बेकार होने से कई लाख रुपये का नुकसान सरकार को हुआ है क्योंकि कोविशील्ड टीका की एक डोज के लिए सरकार को 200 रुपये और कोवाक्सिन की प्रति डोज के लिए 206 रुपये खर्च करने पड़े हैं। इनमें टीका पर लगने वाला कर शुल्क शामिल नहीं है।

केंद्र को जारी करने पड़े दिशा निर्देश
स्थिति यहां तक पहुंची कि केंद्र को राज्यों को टीका की डोज बर्बाद नहीं करने के लिए दिशानिर्देश तक जारी करने पड़े हैं जिसके बाद कई राज्यों में टीका लेने वालों की संख्या को देखते हुए ही वायल का इस्तेमाल किए जा रहा है लेकिन दिल्ली की ही बात करें तो यहां रोजाना 100 से अधिक डोज बर्बाद हो रही हैं। 2

7 जनवरी के आंकड़े लें तो दिल्ली में कोविशील्ड की 39 और कोवाक्सिन की 46 डोज बर्बाद हुईं। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के साथ-साथ केरल और बिहार से भी ऐसे ही आंकड़े सामने आ रहे हैं।

नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशयिलिटी अस्पताल की डॉ. छवि गुप्ता का कहना है कि एक बार वायल खोलने के बाद कोविशील्ड की 10 डोज देना जरूरी है। अगर चार घंटे तक यह संख्या पूरी नहीं होती है तो डोज बेकार हो जाएंगी जिन्हें नष्ट करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

ऐसे समझिए, टीका की डोज का नुकसान
इस समय में देश में दो तरह के टीका सीमित लोगों को दिए जा रहे हैं। इसमें कोविशील्ड है जिसके एक वायल में 5 एमजी-10 डोज और कोवाक्सिन के एक वायल में 10 एमजी-20 डोज हैं। यानी कोविशील्ड की तुलना में इसके वायल में दोगुना अधिक डोज हैं।

एक वायल को खोलने के बाद चार घंटे के भीतर सभी डोज देना जरूरी होता है लेकिन पर्याप्त संख्या न होने की वजह से सभी डोज का इस्तेमाल नहीं होने पर बाकी की डोज खराब हो जाती हैं।

अब इन सावधानियों पर ध्यान
हर केंद्र पर अधिकतम 100 लोगों को टीका देने का लक्ष्य रखा था लेकिन डोज बर्बाद होने के चलते अब कहा है कि वायल में अगर डोज बची है तो 100 से भी ज्यादा लोगों को टीका दिया जा सकता है।

टीका लेने वालों की संख्या को देखते हुए वायल का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। अगर किसी केंद्र पर 22 लोगों टीका लेने वाले हैं और वहां कोवाक्सिन है तो एक वॉयल में 20 लोगों को टीका मिल जाएगा लेकिन शेष दो लोगों को टीका देने के लिए दूसरा वायल खोलना होगा। अगर संख्या बढ़ने की उम्मीद है तो कुछ देर तक इंतजार भी कर सकते हैं।

आज से फ्रंटलाइन वर्करों को भी लगेगा टीका

कोरोना वैक्सीन लगवाते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ-साथ ही अब सोमवार से फ्रंटलाइन वर्करों को भी टीकाकरण में शामिल किया जाएगा। इसके लिए सभी राज्य और संघ शासित प्रदेशों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।  

देश में 68 लाख से भी अधिक फ्रंटलाइन वर्कर को को-विन वेबसाइट पर पंजीकृत किया जा चुका है। उन्हें मैसेज के जरिये टीकाकरण की सूचना भेजी जानी शुरू हो चुकी है। 16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। शनिवार तक देश में 37 लाख से भी स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाया जा चुका है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश के सरकारी और प्राइवेट चिकित्सीय क्षेत्र में कार्यरत 96 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों को पंजीकृत किया गया था। इनमें से अब तक 37 लाख कर्मचारियों को पहली डोज देने के साथ साथ इन्हें अस्थायी प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है।

अब टीकाकरण की रफ्तार को बढ़ाने और जल्द से जल्द पहला चरण पूरा करने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को फ्रंटलाइन वर्कर के लिए अनुमति प्रदान कर दी है। इनमें सुरक्षा जवान, पुलिसकर्मी, सफाई कर्मचारी इत्यादि शामिल हैं। इसके लिए सैन्य चिकित्सीय विभाग को भी टीकाकरण में शामिल किया जा रहा है। कैंट और सीमा के इलाकों में करीब एक हजार बूथ इनके अधीन होंगे।

एक दिन पहले ही स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों को पत्र लिख फरवरी के पहले सप्ताह से फ्रंटलाइन वर्कर को भी टीकाकरण में शामिल करने के निर्देश जारी किए हैं। रविवार को देश के सभी 10 हजार से अधिक बूथ पर इसकी तैयारी भी कर ली है।

घटी सक्रिय मरीजों की संख्या, भारत 16वें पायदान पर
देश में कोरोना संक्रमितों में जहां हर दिन कमी देखने को मिल रही है। वहीं रविवार को लगातार 24वें दिन देश में नए संक्रमित से ज्यादा ठीक होने वालों का आंकड़ा सामने आया है। स्थिति यहां तक है कि दुनिया में सबसे कम सक्रिय मरीजों की सूची में भारत 16वें स्थान तक पहुंच चुका है। एक वक्त पहले तक इस सूची में अमेरिका के बाद भारत दूसरे स्थान पर था।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले एक दिन में 13,052 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान देश में कोरोना वायरस के कारण 127 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 13,965 मरीजों को डिस्चार्ज भी किया गया।

इसी के साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,07,46,183 हो चुकी है जिनमें से 1,04,23,125 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि 154,274 मरीजों की मौत हो चुकी है। फिलहाल देश में 1,68,784 सक्रिय मरीज हैं। देश में लगातार चौथे दिन रिकवरी दर भी 97 फीसदी पर है।

आंकड़ों के अनुसार बीते शनिवार को देश में 1040 सक्रिय मामलों में कमी आई है जिसके चलते सक्रिय दर 1.57 फीसदी पर आ चुकी है। जबकि कोरोना से होने वाली मृत्युदर फिलहाल 1.44 फीसदी है। इसके अलावा कोविड संक्रमण के जांच की बात करें तो पिछले एक दिन में 7.50 लाख सैंपल की जांच हुई है। अब तक 19.65 करोड़ सैंपल की जांच हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब देश के 31 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय मरीजों की संख्या पांच-पांच हजार से भी कम है। फिलहाल 80 फीसदी सक्रिय मरीज पांच राज्य में हैं जिनमें केरल, महाराष्ट्र कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल है।

छह राज्यों में रोजाना 70 फीसदी से ज्यादा मौतें देखने को मिल रही हैं। महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली और पंजाब में मृत्युदर को नियंत्रण में लाने के लिए लगातार चिकित्सीय निगरानी पर ध्यान दिया जा रहा है। 
 
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ब्रिटेन का दावा पुराने वायरस से ये 30 फीसदी अधिक जानलेवा

कोरोना के दूसरे स्ट्रेन से जूझ रही दुनिया के लिए और बुरी खबर है। ब्रिटेन की सरकार का दावा है कि कोरोना का नया रूप पुराने वाले वायरस की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा जानलेवा है। इसी तरह केंट में मिल रहा वायरस का नया रूप वास्तिवक रूप की तुलना में अधिक संक्रामक है क्योंकि वो संक्रमितों के फेफड़ों में तेजी से अपनी संख्या बढ़ा रहा है।

ब्रिटेन के साइंटिफिक एडवाजरी ग्रुप ऑफ इमरजेंसी (सेज) के सदस्य और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के महामारी रोग विशेषज्ञ प्रो. पीटर हॉर्बी का कहना है कि जब भी कोई वायरस अधिक संक्रामक होता है तो वो कुछ समय में जानलेवा हो जाता है। वायरस जब कोशिकाओं में तेजी के साथ फैलता है उतनी ही तेजी से बीमारी की दर फैलती है और शरीर में सूजन का स्तर भी बढ़ता है।

प्रो. हॉर्बी के अनुसार एन501वाई स्ट्रेन पुराने स्ट्रेन से पूरी तरह अलग है। इसी का नतीजा है कि ब्रिटेन में संक्त्रस्मण के साथ मौतों की दर अधिक है। रिसर्च डेस्क।

वायरस की कम मात्रा भी खतरनाक
प्रो. हॉर्बी के अनुसार वायरस जितना अधिक कोशिकाओं को जकड़ने में सफल होगा उतना ही वो खतरनाक होगा। अधिक संक्रामक वायरस कम मात्रा में भी शरीर में पहुंचेगा तो बड़े स्तर पर नुकसान संभव है, क्योंकि वायरस सांस के जरिये फेफड़ों में पहुंचकर अपना कुनबा बढ़ा सकता है।

ब्रिटेन और अमेरिका में दोबारा कोरोना महामारी के प्रसार बढ़ने का यही कारण है। दुनिया के दूसरे देशों को भी इसको लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

कोरोना संक्रमित गर्भवती की जान को भी खतरा
देश में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है जिसमें गर्भवती महिलाओं को शामिल नहीं किया है। अमेरिकी संस्था सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार गंभीर रूप से कोरोना की चपेट में आने वाली गर्भवती को प्रसव के दौरान कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

अमेरिका के 14 राज्यों के 33 अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित 1219 गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन के बाद सीडीसी ने ये दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार हल्के लक्षण वाली गर्भवती की तुलना में गंभीर रूप से संक्रमित गर्भवती को प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव, सिजेरियन या समयपूर्व बच्चे का जन्म हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार हल्के लक्षण वाली गर्भवती की तुलना में गंभीर रूप से बीमार गर्भवती की मौत की भी संभावना ज्यादा रहती है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि नए स्ट्रेन को लेकर गर्भवती को सावधानी बरतनी होगी क्योंकि ये वायरस ज्यादा संक्रामक है। सबसे चिंताजनक ये है कि गर्भवती का टीकाकरण नहीं हो रहा है। एजेंसी।
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