संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान निलंबित किए गए 14 विपक्षी सांसद बजट सत्र में भाग लेने के लिए वापस आएंगे। इन सभी का मामला विशेषाधिकार समितियों को भेजा गया था। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि इसे लेकर सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा से अनुरोध किया था, जिस पर दोनों सदनों के अध्यक्ष सहमत हो गए हैं।
दरअसल, लोकसभा और राज्यसभा दोनों समितियों ने सिफारिश की थी कि शीतकालीन सत्र के दौरान सांसदों द्वारा आचरण के लिए खेद व्यक्त करने के बाद उनका निलंबन वापस लिया जाए। सांसदों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा था।
धनखड़ ने 11 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द किया
इस बीच राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने 11 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया है। इन 11 सांसदों को पैनल ने विशेषाधिकार हनन का दोषी ठहराया था। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषाधिकार समिति ने कथित तौर पर राज्यसभा के सभापति को सिफारिश की है कि सदस्यों द्वारा पहले ही झेली गई निलंबन की अवधि को अपराध के लिए पर्याप्त सजा के रूप में माना जाए।
क्या है मामला?
बता दें कि संसद के पिछले सत्र के दौरान कुल 146 विपक्षी सांसदों को सदन में तख्तियां लाने और बार-बार संसदीय कार्यवाही में बाधा डालने के लिए निलंबित कर दिया गया था। इनमें 100 लोकसभा और बाकी राज्यसभा से थे। इनमें से 14 के उल्लंघन को अधिक गंभीर माना गया था। लोकसभा और राज्यसभा ने मिलकर 132 सांसदों को 21 दिसंबर को समाप्त हुए शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया था और इन 14 सांसदों का मामला संबंधित विशेषाधिकार समिति को भेज दिया था।
संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने मंगलवार को कहा कि सभी का निलंबन वापस लिया जाएगा। हमने सरकार की ओर से लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति से अनुरोध किया है और वे सहमत हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में भाग लेने वाले विभिन्न दलों के नेताओं से कहा गया था कि सांसदों को सत्र के दौरान कक्ष के अंदर कोई तख्तियां या इसी तरह की सामग्री लाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें इस निर्णय का पालन करना चाहिए था। नियमों के उल्लंघन की वजह से ही कार्रवाई की गई। बजट सत्र बुधवार से शुरू होगा।