बीते साल दिसंबर में पाकिस्तानी जासूसी रैकेट में गिरफ्तार सात आरोपी नौसैनिक 2017 में नौसेना में शामिल हुए थे। सितंबर 2018 में वे सोशल नेटवर्किंग साइट पर तीन से चार महिलाओं के संपर्क में आए। इन महिलाओं ने बाद में नौसेना कर्मियों का परिचय एक पाकिस्तानी हैंडलर से कारोबारी बताकर करवाया था, जिसने उनसे नौसेना के ठिकानों की गोपनीय जानकारियां हासिल की थीं। ये नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों से लौटने के बाद इनके लोकेशन की जानकारी दिया करते थे। इन्होंने 2018 में सितंबर-अक्तूबर के बीच नौसेना से जुड़ी कई संवेदनशील जानकारियों हैंडलर को दी। इसके बदले इन्हें एक हवाला ऑपरेटर की मदद से हर महीने पैसे भी दिए गए। उस वक्त भी पुलिस ने तीन को विशाखापट्टनम से, दो को कारवाड़ और दो को मुंबई नौसैनिक अड्डे से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से खुफिया विभाग बडे़ पैमाने पर नौसेना कर्मियों के फेसबुक, ट्विटर समेत सोशल मीडिया पर नजर रखे हुए था।