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सामान्य वर्ग के गरीबों को निजी शिक्षण संस्थानों में भी मिलेगा आरक्षण

Tue, 08 Jan 2019 06:52 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम मोदी
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केंद्र सरकार ने गरीब सवर्णों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया। संसद ने निचले सदन लोकसभा में इस पर बहस हुई। सदन में सरकार ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद इस विधेयक को पारित कराने के लिए मतदान भी हो सकता है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने अपने सभी सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने का तीन स्तरीय व्हिप जारी किया है। 
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बहस शुरू होने के पहले सरकार ने इस विधेयक की कॉपी सांसदों और मीडिया को पढ़ने के लिए दी। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक गरीबों को मिलने वाला 10 फीसदी आरक्षण निजी क्षेत्र के सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में भी मिलेगा। वहीं अल्पसंख्यक संस्थानों में यह आरक्षण लागू नहीं होगा। 

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केंद्र की भाजपा सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को लागू करने के लिए 124वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है। इस विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है। लेकिन राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत होगी। 

गरीब सवर्णों को दिए जाने वाले 10 फीसदी का यह आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्गों को दिए जाने वाले 50 फीसदी आरक्षण की सीमा से अलग होगा। केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को इस संशोधन को मंजूरी दी थी। 
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संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन बढ़ा दी गई है। यानी अब राज्यसभा में 9 जनवरी तक कामकाज होगा। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने के मकसद से राज्यसभा की कार्यवाही बढ़ाई है।
 
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