दलों की ओर से कहा गया है कि 26 मई को साहसिक और शांतिपूर्ण किसान संघर्ष के छह महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध दिवस का समर्थन करते हैं।
कृषि के तीन नए कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध दिवस का 12 विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया है। प्रमुख विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की है।
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कहा गया है कि 12 मई को हमने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री मोदी को इस बाबत पत्र लिखा था जिसमें कहा था कि हमारे लाखों अन्नदाताओं को महामारी का शिकार होने से बचाने के लिए कृषि कानूनों को निरस्त करें ताकि वे भारत के लोगों का पेट भरने के लिए अन्न का उत्पादन जारी रख सकें।
विपक्षी दलों का कहना है कि हम कृषि कानूनों को तुरंत निरस्त करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी 2+50 प्रतिशत के फार्मूले के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य के वैधानिक अधिकार की मांग करते हैं।
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उनका कहना है कि केंद्र सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना चाहिए और किसान संयुक्त मोर्चा के साथ फिर से बातचीत शुरू करनी चाहिए।
विपक्षी दलों की ओर सोनिया गांधी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस), एचडी देवगौड़ा (जेडी-एस), शरद पवार (एनसीपी), ममता बनर्जी (टीएमसी), उद्धव ठाकरे (शिवसेना), एमके स्टालिन (डीएमके), हेमंत सोरेन (झामुमो), फारूक अब्दुल्ला (जेकेपीए), अखिलेश यादव (सपा), तेजस्वी यादव (राजद), डी राजा (भाकपा) और सीताराम येचुरी (माकपा) ने समर्थन दे हस्ताक्षर किए हैं।