फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

COP27: हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए 12 महीने की योजना शुरू, जलवायु परिवर्तन से लड़ाई होगी आसान

Sat, 12 Nov 2022 12:58 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

यूएनएफसीसीसी ने कहा कि योजना में बिजली, परिवहन और स्टील प्रोडक्शन को कम करने और कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ाने पर काम किया जाएगा।
विज्ञापन
राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मिस्र में चल रहे कोप 27 सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई मुद्दों पर बातचीत हुई है। दुनिया के बड़े देश इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत और अमेरिका सहित अन्य देशों ने स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने वाली 12 महीने की कार्य योजना तैयार की, जिससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए मदद मिल सकेगी। 

विज्ञापन


यूएनएफसीसीसी ने कहा कि योजना में बिजली, परिवहन और स्टील प्रोडक्शन को कम करने और कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ाने पर काम किया जाएगा। साथ ही संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन के 28वें संस्करण तक स्थायी कृषि में बदलाव के लिए भी काम किया जाएगा। बता दें कि कोप28 संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया जाएगा।

स्वच्छ ऊर्जा को किफायती और सुलभ बनाने पर दुनिया सहमत, रखे 25 लक्ष्य
संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप27) में शुक्रवार को द ब्रेकथ्रू एजेंडा पहल पर सभी पक्ष सहमत हुए। कॉप26 के दौरान 47 देशों के नेताओं की तरफ से गहन उत्सर्जन क्षेत्रों में स्वच्छ तकनीक और टिकाऊ समाधानों को किफायती, सुलभ और आकर्षक बनाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता के आधार पर घोषित ब्रेकथ्रू एजेंडा के तहत 25 निर्णायक लक्ष्य रखे गए हैं, जिन्हें अगले वर्ष संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होने वाले सीओपी-28 तक हासिल किया जाना है। वहीं अमेरिका और यूएई कृषिक्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के विकास के लिए आठ अरब डॉलर का फंड बनाने के लिए सहमत हुए हैं। 
विज्ञापन


वैश्विक जीडीपी के 50 फीसदी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश इन लक्ष्यों के तहत प्राथमिकता के आधार पर बिजली, परिवहन व स्टील क्षेत्र को काबर्न मुक्त करेंगे। इसके साथ ही कम उत्सर्जन के साथ हाइड्रोजन उत्पादन बढ़ांगे व कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव करते हुए इसे संवहनीय बनाने के प्रयास करेंगे। इन उपायों को ऊर्जा लागत में कटौती, उत्सर्जन को तेजी से कम करने और दुनियाभर में अरबों लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिहाज से संवेदनशील बनाया गया है। कॉप26 के अध्यक्ष आलोक शर्मा के मुताबिक दुनिया एक खतरनाक भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का सामना कर रही है। इस दौर में ब्रेकथ्रू एजेंडा जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्यादा जरूरी हो गए हैं।

इस तरह हासिल होंगे लक्ष्य 
प्रत्येक लक्ष्य को प्रतिबद्ध देशों के गठबंधन हासिल करेंगे। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन इन देशों की पहलों का समर्थन करेंगे व कोर ग्रुप के देशों की सरकारें इसका नेतृत्व करेंगी। इसके साथ ही ज्यादा देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

ये हैं बड़े मुद्दे 
कम उत्सर्जन और शून्य उत्सर्जन स्टील, हाइड्रोजन और टिकाऊ बैटरी के लिए सामान्य परिभाषा विकसित की जाएगी, 50 बड़े शुद्ध-शून्य उत्सर्जन औद्योगिक संयंत्र स्थापित होंगे। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की आखिरी तिथि निर्धारित होगी। हरित उद्योग उत्पादों की मांग को बढ़ाई जाएगी।  

100 हाइड्रोजन घाटी होंगी तैयार 
विश्व बैंक 1.6 अरब डॉलर ग्रीन हाइड्रोजन वैश्विक कार्यक्रम विकसित करने में निवेश करेगा। 100 हाइड्रोजन वैली और सीमा पार पावर ग्रिड ढांचा परियोजनाएं तैयार की जाएंगी।

फर्स्ट मूवर्स गठबंधन और बढ़ा 
वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 30% की भागीदार वाले भारी उद्योग और लंबी दूरी के परिवहन क्षेत्रों को कार्बन मुक्त करने के लिए 12 अरब डॉलर के योगदान का संकल्प लिया है।

मिशन पॉसिबल
दुनिया के शीर्ष जलवायु संगठनों के गठबंधन मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप (एमपीपी) ने औद्योगिक व परिवहन क्षेत्र के वे सात लक्ष्य तय किए हैं, जो हर हाल में 2030 तक हासिल करने होंगे। 200 औद्योगिक कंपनियों के सहयोग से एमपीपी की तरफ से इन लक्ष्यों को हासिल करने की संक्रमण रणनीति पेश की जाएगी।

विश्व में बढ़ा कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन लेकिन चीन में घट गया
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के लिए बुरी खबर है, दुनिया में इस साल कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस के जलने से पिछले साल के मुकाबले 1 प्रतिशत अधिक कार्बन डाइऑक्साइड हवा में उत्सर्जित हुआ है। लेकिन उत्सर्जन पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार इस खबर में एक अजीब मोड़ भी है। वह ये कि 2021 की तुलना में इस साल चीन का कार्बन प्रदूषण 0.9 प्रतिशत कम था, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में यह 1.5 प्रतिशत अधिकथा। यह दोनों ही विपरीत दीर्घकालिक रुझान हैं क्योंकि अब तक अमेरिकी उत्सर्जन लगातार गिर रहा था जबकि चीनी उत्सर्जन बढ़ रहा था। यह जानकारी मिस्र में अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ता में शुक्रवार तड़के जारी ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में सामने आई है। 

भारत में इस साल 6% बढ़ा कार्बन उत्सर्जन
बाकी दुनिया के वैज्ञानिक भी ऐसा ही मानते हैं। ब्राउन यूनिवर्सिटी के जलवायु वैज्ञानिक किम कॉब के मुताबिक यह बुरी खबर है, बढ़ते उत्सर्जन में किसी भी अच्छी बात को देखना मुश्किल है। हमें ग्लोबल वार्मिंग को घटा कर 2030 तक आधा करना है और 2022 में, दुनिया ऊर्जा और सीमेंट के उपयोग से हवा में 36.6 बिलियन मीट्रिक टन (40.3 बिलियन अमेरिकी टन) कार्बन डाइऑक्साइड डालने की राह पर है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि हर 75 मिनट में गीज़ा के महान पिरामिड के वजन के बराबर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हो रही है। उत्सर्जन में बढ़त की बात करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा भारत में इस साल 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि यूरोप में 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। दुनिया में औसतन 1.7 प्रतिशत कार्बन प्रदूषण बढ़ा है।

जलवायु परिवर्तन से राहत के लिए दुनिया को सबसे ज्यादा तकनीक की जरूरत: भारत
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सचिव लीना नंदन ने कॉप 27 में इंडिया पवेलियन में एक पैनल चर्चा के दौरान कहा कि जलवायु परिवर्तन केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है, जिन्हें उत्सर्जक के रूप में देखा जाता है। लीना नंदन ने कहा कि आज भारत और विश्व को जिस चीज की जरूरत है, वह है प्रौद्योगिकी। उन्होंने कहा कि अब इस बात को बड़े पैमाने पर माना और समझा जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता; वह हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस की दुनिया को चेतावनी
वहीं इससे पहले संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता (कॉप 27) में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने दुनिया को चेताते हुए कहा था कि जलवायु परिवर्तन के चलते दुनिया नरक के हाईवे और पैर एक्सेलरेटर पर है। अपनी जिंदगी की जंग हम तेजी से हार रहे हैं। हमारे पास यह आखिरी मौका है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ग्रह को बचा सकें। अब कोई विकल्प शेष नहीं है। या तो सहयोग करें या नरक में जलें। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें