गुजरात उच्च न्यायालय ने सोमवार को 40 जिला न्यायाधीशों के लिए हुई लिखित परीक्षा के परिणाम को 'शून्य' बताया। यह परीक्षा 40 जिला जजों का चुनाव करने के लिए आयोजित की गई थी। मगर हैरानी की बात यह है कि उसमें हिस्सा लेने वाले 19 कार्यरत न्यायाधीश और 1,372 वकीलों में से कोई भी परीक्षा को पास नहीं कर पाया।
नियमानुसार उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीशों की खाली पड़ी 65 प्रतिशत सीटों पर वरिष्ठ सिविल जजों का प्रमोशन कर दिया था। बाकी के बचे हुए पदों में से 25 प्रतिशत पर वकीलों का और बची हुई 10 प्रतिशत पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों का चयन होना था।
40 खाली पदों में से 26 को प्रैक्टिस कर रहे वकीलों से भरा जाना था। जिला जज के 14 पदों के लिए 119 न्यायिक अधिकारी मैदान में थे। इसके लिए मार्च में आवेदन आमंत्रित किए गए थे और जून में 1,372 वकीलों ने एलिमिनेशन टेस्ट में हिस्सा लिया था। ऑनलाइन परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद उच्च न्यायालय ने 494 आवेदकों को लिखित परीक्षा में बैठने की मंजूरी दी थी।
चार अगस्त को परीक्षा आयोजित की गई थी और न्यायिक अधिकारियों के लिए उपलब्ध 10 प्रतिशत कोटा में प्रमोशन के लिए फीडर कैडर से 119 जजों ने हिस्सा लिया था। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एचडी सुधार ने कहा कि 494 वकीलों में से एक भी उम्मीदवार लिखित परीक्षा में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाया।