डिप्टी सीएम ने कहा कि आदिवासी आबादी वाले मयूरभंज जिले में अति गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। यहां इस कुपोषण से कुल 1460 बच्चे ग्रसित हैं। जबकि सीएम मोहन चरण माझी के गृह जिले क्योंझर में 1269 बच्चे अति गंभीर कुपोषण श्रेणी में पाए गए। इसके अलावा नबरंगपुर जिले में 760 बच्चे इस श्रेणी में पाए गए।
ओडिशा सरकार ने शनिवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में 11710 बच्चे अति गंभीर कुपोषण से ग्रसित हैं। राज्य की डिप्टी सीएम और महिला और बाल कल्याण विभाग की प्रभारी पार्वती परिदा ने यह जानकारी भाजपा विधायक लक्ष्मण बाग के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि कुपोषण रोकने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है।
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डिप्टी सीएम ने कहा कि आदिवासी आबादी वाले मयूरभंज जिले में अति गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। यहां इस कुपोषण से कुल 1460 बच्चे ग्रसित हैं। जबकि सीएम मोहन चरण माझी के गृह जिले क्योंझर में 1269 बच्चे अति गंभीर कुपोषण श्रेणी में पाए गए। इसके अलावा नबरंगपुर जिले में 760 बच्चे इस श्रेणी में पाए गए।
डिप्टी सीएम ने बताया कि रायगाडा जिले में 645, कालाहांडी में 636, मलकानगिरी में 570, गंजम में 558 और बालासोर में 536 बच्चे इसी श्रेणी में है। वहीं राज्य के 30 जिलों में जगतसिंहपुर में सबसे कम 50 बच्चे कुपोषित हैं।
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उन्होंने कुपोषण की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की जानकारी सदन को दी। परिदा ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूरक पोषण कार्यक्रम, मुख्यमंत्री संपूर्ण पुष्टि योजना (एमएसपीवाई), पद प्रतिष्ठा कार्यक्रम (पीपीके) और ममता दिवस-वीएचएनडी (ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस) आयोजित करता है।