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1100 लैब, 1200 गुना बढ़ी जांच क्षमता फिर भी एक फीसदी आबादी से हम दूर

Mon, 06 Jul 2020 07:30 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला, परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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कोरोना टेस्ट - फोटो : अमर उजाला
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राज्यों की सुस्ती के चलते देश कोरोना की जांच की मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल तक नहीं कर पा रहा है। 19 दिन पहले केंद्र सरकार ने रोज तीन लाख सैंपल की जांच क्षमता विकसित होने का दावा किया था, लेकिन अब तक यह आंकड़ा ढ़ाई लाख भी पार नहीं कर पाया है। स्थिति यह है कि पहला मरीज मिलने के 157 दिन बाद भी 137 करोड़ की आबादी वाले देश में एक फीसदी लोगों की जांच नहीं हो पाई है। आईसीएमआर के अनुसार, देश में 97,89,066 सैंपल की जांच हो चुकी है।
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दरअसल, देश में पहला संक्रमित 30 जनवरी को मिला था लेकिन जांच 20 जनवरी से पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी में शुरू हो चुकी थी। उस दौरान रोज 200 से 250 सैंपल की जांच लैब में हो रही थी। हालांकि, बीते 157 दिन में लैब में 1100 गुना और रोज सैंपल जांच क्षमता में 1200 गुना वृद्घि के बाद भी जांच उस गति से आगे नहीं बढ़ी, जिसका लक्ष्य केंद्र ने रखा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पांच बार केंद्र की ओर से राज्यों को पत्र लिख जांच बढ़ाने, मरीजों की समय पर पहचान करने और आइसोलेशन निगरानी के लिए अपील कर चुका है लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है।
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16 जून तक थी 3 लाख जांच क्षमता

16 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में रोज तीन लाख सैंपल जांच की क्षमता होने की पुष्टि की थी। तब लैब की संख्या 907 थी जोकि रविवार को 1100 पहुंच गई है। हालांकि, 16 जून तक रोजाना औसतन 1.40 लाख सैंपल की जांच हो रही थी जोकि अब 2.40 तक पहुंची है लेकिन मौजूदा क्षमता की बात करें तो केंद्र सरकार के ही अनुसार भारत एक दिन में साढ़े तीन लाख सैंपल की जांच आसानी से कर सकता है। बीते एक दिन में 2.48 लाख सैंपल की जांच हुई है।

10 हजार सैंपल जांचने की क्षमता पर जांचे जा रहे सिर्फ 2 हजार

हैदराबाद में रोज10 हजार सैंपल जांचने की क्षमता है लेकिन 2 से 3 हजार सैंपल की जांच हो रही है। यूपी में भी 130 लैब हैं, जहां 32 हजार से अधिक सैंपल की जांच हो सकती है लेकिन यहां भी मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

 
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मरीजों की मौत को रोक सकती है समय पर जांच : डॉ. सौम्या

आईसीएमआर की पूर्व महानिदेशक और डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि भारत में जांच में तेजी पर खुशी है। स्वदेशी किट्स से बेहतर कार्य किए जा रहे हैं जिन्हें आगे भी जारी रखना जरूरी है। जांच, निगरानी, आइसोलेशन और क्वारंटीन पर फोकस करना होगा।

दिल्ली से लेनी चाहिए सीख : नीति आयोग

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी राज्यों से टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटिंग पर ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि प्रति 10 लाख आबादी पर सबसे ज्यादा जांच 32,863 दिल्ली में हो रही हैं जो बाकी राज्यों को भी करना चाहिए।
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