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11 साल की यूरोपीय लड़की ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा खत, भगवान शिव में विश्वास, आना चाहती है भारत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Mon, 03 Jun 2019 11:49 AM IST
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अपनी मां के साथ एलिजा वानात्को - फोटो : social media

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक 11 साल की यूरोपीय लड़की ने खत लिखते हुए भारत में ठहरने की इजाजत मांगी है। एलिजा वानात्को नाम की इस लड़की और उसकी मां को भारत में तय अवधि से अधिक ठहरने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया है। वानात्को ने हस्तलिखित खत में प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संबोधित किया है। जिसमें उसने भगवान शिव के प्रति अपने प्यार, नालंदा देवी पर्वत और गोवा में गायों की सेवा करने की यादों के बारे में लिखा है।

 


 

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अपनी मां के साथ एलिजा वानात्को - फोटो : social media
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक 11 साल की यूरोपीय लड़की ने खत लिखते हुए भारत में ठहरने की इजाजत मांगी है। एलिजा वानात्को नाम की इस लड़की और उसकी मां को भारत में तय अवधि से अधिक ठहरने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया है। वानात्को ने हस्तलिखित खत में प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संबोधित किया है। जिसमें उसने भगवान शिव के प्रति अपने प्यार, नालंदा देवी पर्वत और गोवा में गायों की सेवा करने की यादों के बारे में लिखा है।

 


 

अपनी मां के साथ एलिजा वानात्को - फोटो : social media
वानात्को के लिखे इस खत को उसकी मां मारटा कोटलारस्का ने ट्विटर पर शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को ट्वीट किया है। इसमें लिखा है, "मुझे गोवा के अपने स्कूल से प्यार है, खूबसूरत प्रकृति और.... मुझे एनिमल रेस्क्यू सेंटर में की गई मेरी वालंटियरिंग की याद आ रही है, जहां मैंने गायों की देखभाल करने में मदद की थी।

मेरी मां को 24 मार्च, 2019 को भारत में दाखिल नहीं होने दिया गया, कहा गया कि हमें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। क्योंकि हम तय अवधि से अधिक ठहरे थे।"

बता दें वानात्को की मां एक कलाकार और फोटोग्राफर हैं। वह भारत में बी 2 बी वीजा पर थीं। कोटलारस्का अपने भारतीय वीजा को नवीनीकृत करने के लिए श्रीलंका गई थीं, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने उन्हें 24 मार्च को वापस भेज दिया गया। खत में अपनी परेशानी बताते हुए वानात्को ने लिखा है,

"मेरी मां 24 मार्च को भारत में दोबारा प्रवेश नहीं कर पाईं और हमें वीजा खत्म होने के कारण ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। यह सिर्फ इसलिए अनुचित लगता है क्योंकि यह हमारी गलती नहीं थी।"

अपनी मां के साथ एलिजा वानात्को - फोटो : social media
वानात्को ने लिखा है कि भारतीय ना होने के बावजूद भी वह भारत को अपना घर मानती है। उसने लिखा है कि उनके मामले पर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।

दोनों मां बेटी फिलहाल कंबोडिया में हैं और भारत आने का इंतजार कर रही हैं। खत में उसने लिखा है कि वह हिंदुत्व और आध्यात्मिकता से जुड़ चुकी है। उसका कहना है कि वह भारत में बिताए अपने पलों को बहुत याद करती है। 

उसने खत में आगे लिखा है, "मुझे ऐसा लग रहा है कि सबकुछ दोबारा से खत्म हो गया है। मैं भगवान शिव और नालंदा देवी से मदद करने के लिए प्रार्थना मांग रही हूं और मैंने आपको खत इसलिए लिखा क्योंकि आप सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हो, जो मेरी और मेरी मां की भारत, हमारे घर आने में मदद कर सकते हो। कृपया हमारी मदद करें और हमें ब्लैकलिस्ट से हटाने की मंजूरी दें।"

एलिजा वानात्को - फोटो : social media
इससे पहले वानात्को की मां ने अप्रैल माह में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद मांगते हुए दावा किया था कि उन्हें उत्तराखंड के चमोली के फॉरन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस ने "एक गलतफहमी" के कारण तय अवधि से ज्यादा ठहरने के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
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