नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 11.49 करोड़ घरों में अब नल के पानी के कनेक्शन हैं और 1.53 लाख से अधिक गांवों में पेयजल की आपूर्ति उपलबध है। ऐसा इसलिए संभव हो सका है क्योंकि सरकार ने सभी को पीने का पानी उपलब्ध कराने के अपने प्रयासों को दोगुना कर दिया है।
21 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार कि 31 मार्च (2022-23) को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में सरकार की ओर से इस उद्देश्य के लिए 70,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसके बाद स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और आकांक्षी जिलों में पाइप से पानी की आपूर्ति में भारी उछाल आया। चालू वित्तीय वर्ष में आवंटित राशि वर्ष 2018-19 में आवंटित 5,500 करोड़ रुपये से 12 गुना अधिक थी।
ये आंकड़े विश्व जल दिवस के रूप में चिह्नित 21 मार्च को जारी संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2023 में सामने आए हैं। इसमें कहा गया है कि दुनिया की 26 प्रतिशत आबादी के पास सुरक्षित पेयजल तक पहुंच नहीं है और 46 प्रतिशत की बुनियादी स्वच्छता (Basic Sanitation) तक भी पहुंच नहीं है।
सरकार जल संरक्षण और भूजल के स्तर को बढ़ाने के लिए जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, नमामि गंगे और राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और प्रबंधन कार्यक्रम सहित विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है।
सरकार का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन पेयजल उपलब्ध कराना
आंकड़ों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन पीने योग्य नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान करना है। 21 मार्च 2023 तक 11.49 करोड़ से अधिक घरों को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। 1.53 लाख गांव 21 मार्च 2023 तक हर घर जल योजना से जुड़ चुके हैं।
आंगनवाड़ी केंद्रों में पाइप से पानी की आपूर्ति तीन साल से भी कम समय में 37 गुना बढ़कर 9.34 लाख हो गई है। इसी तरह, स्कूलों में पाइप से पानी की आपूर्ति 18 गुना बढ़कर 9.02 लाख और आकांक्षी जिलों में छह गुना हो गई है।
आंकड़ों के अनुसार पानी की कमी से जूझ रहे देश के सात राज्यों के 80 जिलों के 8220 ग्राम पंचायतों में 6000 करोड़ रुपये की लागत से अटल भूजल योजना का क्रियान्वयन हो रहा है। इन सात राज्यों में हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। टिकाऊ भूजन प्रबंधन के लिए ये योजना 5 वर्ष की अवधि तक चलाई जाएगी।
2050 तक भारत के शहरों में सर्वाधिक जल संकट
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 में दुनिया की 1.7 से 2.40 अरब शहरी आबादी जल संकट से जूझ सकती है। इससे सबसे ज्यादा भारत के प्रभावित होने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016 में 93.3 करोड़ शहरी आबादी जल संकट का सामना कर रही थी।
‘संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2023: जल के लिए साझेदारी और सहयोग’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में करीब 80 प्रतिशत आबादी जल संकट से जूझ रही है, खासतौर पर पूर्वोत्तर चीन, भारत और पाकिस्तान में। यूनेस्को की महानिदेशक आंड्रे एजोले ने कहा, वैश्विक संकट के नियंत्रण से बाहर जाने से पहले मजबूत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तत्काल स्थापित करने की जरूरत है।
जल प्रदूषण चिंता का विषय
उन्होंने कहा कि जहां तक जल प्रदूषण की बात है तो इसका सबसे बड़ा स्रोत अनुपचारित अपशिष्ट जल है। विश्व स्तर पर 80% अपशिष्ट जल बिना किसी उपचार के पर्यावरण में छोड़ दिया जाता है। विकासशील देशों में यह आंकड़ा करीब 99% है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 40 वर्षों में विश्व स्तर पर पानी का इस्तेमाल लगभग एक प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।