केबल टीवी के जरिये केंद्र सरकार 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को सस्ती इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने की तैयारी में है। टेलीकॉम नियामक ट्राई की इस सिफारिश पर दूरसंचार मंत्रालय में अंतिम दौर का विमर्श चल रहा है। यह कदम तेज गति का इंटरनेट ब्रॉडबैंड माध्यम से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के आमजन तक पहुंचाने के लिए है। इसके लागू होने पर धीमे और महंगे वायरलेस डेटा चलन पर अंकुश लगेगा।
मौजूदा समय देश में 93 फीसदी लोग इंटरनेट वायरलेस यानी वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं जबकि महज सात प्रतिशत लोग ब्रॉडबैंड यानी तारों के माध्यम से यह सेवा लेते हैं। दुनिया भर में ब्रॉडबैंड का इतना खराब प्रतिशत किसी और देश में नहीं है। ट्राई चेयरमैन आरएस शर्मा के मुताबिक, उम्मीद है कि मंत्रालय अगले दो माह के अंदर केबल टीवी लाइन के जरिये 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को इंटरनेट सेवाएं देने की मंजूरी देगा, क्योंकि इससे लोगों को तेज और अच्छी इंटरनेट सेवा मिलेगी।
ट्राई की सिफारिशें मानने से तीन स्तर पर खर्च बचेगा। पहला केबल बिछाने, दूसरा ब्रॉडबैंड स्थापित करने और तीसरा ऑपरेटिंग का, जिसका लाभ सीधे उपभोक्ता को होगा। शर्मा ने बताया कि वाई-फाई इंटरनेट सेवा की अपनी सीमाएं हैं। देश में 93 प्रतिशत लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने से उन्हें कम स्पीड और अन्य शिकायतें रहती हैं। वहीं, दुनियाभर में औसतन 46 फीसदी लोग फिक्स लाइन इंटरनेट यानी ब्रॉडबैंड और 54 प्रतिशत लोग वायरलेस का इस्तेमाल करते है।
केबल टीवी के जरिये लोगों को बेहतर इंटरनेट सेवा मिल सकेगी और फिक्स लाइन इंटरनेट का विस्तार होगा। इसके अलावा क्षेत्रीय केबल ऑपरेटर की आय भी बढ़ेगी, तकनीकी क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा और अच्छी डाटा स्पीड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सबसे अच्छी बात कि बिना किसी अतिरिक्त व्यवस्था के दस करोड़ परिवार इंटरनेट से जुड़ जाएंगे। ऐसा शायद ही किसी देश में पहले कभी नहीं हुआ। भविष्य में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।