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EC: महाराष्ट्र चुनाव में 1,440 VVPAT का किया गया सत्यापन, चुनाव अधिकारी बोले- EVM की गणना से मिले सभी नतीजे

Wed, 11 Dec 2024 09:51 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर उठाए जा रहे सवाल और कुछ राजनीतिक दलों की तरफ से ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों पर अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी किरण कुलकर्णी ने कहा, 'ईवीएम में इस्तेमाल होने वाले चिप्स एक बार प्रोग्राम किए जाने के बाद बदले नहीं जा सकते। ये मशीनें बाहरी नेटवर्क से जुड़ी नहीं होतीं, जिससे इन्हें हैक करना असंभव हो जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी किरण कुलकर्णी ने बताया कि पिछले महीने हुए राज्य विधानसभा चुनावों में 1,440 वीवीपैट (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की जांच की गई और उनके परिणाम ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की गिनती से पूरी तरह मेल खाते पाए गए।
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वीवीपैट और ईवीएम की प्रक्रिया
वीवीपैट, ईवीएम से जुड़ा एक उपकरण है जो वोट की पुष्टि के लिए एक पर्ची प्रिंट करता है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करने के लिए है कि मतदाता का वोट सही तरीके से दर्ज हो रहा है। एसीईओ कुलकर्णी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर जोर देते हुए कहा कि ये मशीनें स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और इन्हें हैक करना असंभव है। यह बयान विपक्षी दलों की तरफ से ईवीएम पर सवाल उठाने और बैलेट पेपर की वापसी की मांग के बीच आया है।

ईवीएम और वीवीपैट की पारदर्शिता
किरण कुलकर्णी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अनिवार्य की गई चेकिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों को ईवीएम और वीवीपैट की जांच करने का अधिकार है। इस विधानसभा चुनाव में 288 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 1,440 वीवीपैट की जांच की गई, और सभी के परिणाम ईवीएम से मेल खाते हैं।
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ईवीएम के खिलाफ आरोपों पर प्रतिक्रिया
कुछ राजनीतिक दलों की तरफ से ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों पर किरण कुलकर्णी ने कहा, 'ईवीएम में इस्तेमाल होने वाले चिप्स एक बार प्रोग्राम किए जाने के बाद बदले नहीं जा सकते। ये मशीनें बाहरी नेटवर्क से जुड़ी नहीं होतीं, जिससे इन्हें हैक करना असंभव हो जाता है।

बूथ कैप्चरिंग और बैटरी चार्ज के सवालों पर जवाब
बीड जिले में कथित बूथ कैप्चरिंग के वीडियो पर उन्होंने कहा कि ये वीडियो या तो मौजूदा चुनावों से संबंधित नहीं थे या महाराष्ट्र के नहीं थे। वहीं बैटरी चार्ज के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ईवीएम की बैटरी मोबाइल बैटरी जैसी नहीं होती। यह लंबी अवधि तक चलने वाली होती है और इसकी क्षमता 5 साल की होती है।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए VVPAT का इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग हर विधानसभा क्षेत्र में 5 वीवीपैट को यादृच्छिक तरीके से चुनकर उनकी पर्चियों की गिनती करता है और उसे ईवीएम के परिणामों से मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया उम्मीदवारों, एजेंटों और अधिकारियों की उपस्थिति में होती है। एसीईओ किरण कुलकर्णी ने आखिरी में कहा, 'ईवीएम की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।'
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