पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में पेड़ कटान का है मामला
शिकायतकर्ता मनोज कौशल की शिकायत के बाद हो रही एनजीटी में सुनवाई
वीसी के माध्यम से दो मई को हुई सुनवाई
सुरेश बसन
ऊना। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) में एक बार फिर पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र का मामला गूंजा है। दो मई को इस विषय को लेकर वर्चुअल माध्यम से हुई सुनवाई की आदेश कापी हाल ही भी सामने आई है। सुनवाई में सीईटीपी प्लांट एवं यहां हुए पेड़ कटान को लेकर एनजीटी संबंधित विभागों के दायर जवाब पर चर्चा हुई है। कुछ विषयों के संबंध में एनजीटी ने संबंधित विभागों की ओर से दायर जवाब पर आपत्ति जाहिर की है।
एनजीटी के संज्ञान पर विभागों की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ताओं ने अतिरिक्त जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। इस पर अगली सुनवाई से एक सप्ताह पूर्व जवाब देने के निर्देश एनजीटी ने दिए हैं। अब अगली सुनवाई 9 अगस्त को सूचीबद्ध की गई है। मामले में शिकायतकर्ता कोटला कलां निवासी एवं पूर्व सैनिक मनोज कौशल की शिकायत पर हुई सुनवाई में इससे पूर्व जिला प्रशासन एवं संबंधित उद्योग, वन विभाग ऊना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में पेड़ कटान और सीईटीपी को लेकर जनवरी माह में जवाबतलब किया था। यहां वन विभाग की ओर से मामले में भारत सरकार की अनुमति के अनुसार पेड़ कटान नौ हजार से ज्यादा होना था, लेकिन उसमें से 7000 के करीब पेड़ कटान हुआ। उसके बदले कई गुणा पेड़ लगाए जाने का तर्क बाकायदा सुबूत के साथ दिया गया है।
दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सीईटीपी प्लांट न लगने के संबंध में यहां औद्योगिक क्षेत्र में कम इंडस्ट्रीज होने की बात कही जानी बताई गई है। सभी पहलुओं पर एनजीटी के जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की ओर से सुनवाई के दौरान तथ्यों की जांच की गई। कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर एनजीटी ने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के प्रस्ताव के संबंध में सभी विषयों को स्पष्ट करने को कहा है। शिकायतकर्ता मनोज कौशल ने बताया कि एनजीटी ने दायर किए गए उत्तरों का अध्ययन किया है। सीईटीपी की स्थापना न होने पर एनजीटी ने एतराज जताया है। इस पर दिए गए तर्क भी उन्होंने सही नहीं पाए। फिलहाल विभागों के अधिवक्ता ने अतिरिक्त जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। यह अतिरिक्त उत्तर सुनवाई की अगली तारीख से एक सप्ताह पहले दाखिल करना होगा।
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वन विभाग ने इस विषय को लेकर पहले ही जवाब दायर कर दिया है। इस पूरे तथ्यों के साथ पेड़ कटान एवं नये पौधे लगाने को लेकर सुबूत दिए गए हैं।
-सुशील राणा, वन मंडलाधिकारी, ऊना