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पांच दशक से मुआवजे का इंतजार

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मैहतपुर (ऊना)। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र मैहतपुर के ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग बिना निशानदेही के बने हैं। इसे लेकर स्थानीय क्षेत्र के ग्रामीण पिछले लगभग पांच दशकों से मुआवजा मांग रहे हैं, लेकिन आज तक क्षेत्र के ग्रामीणों की आवाज को नहीं सुना गया। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का मानना है कि 1970-71 में जब नंगड़ा-बनगढ़ संपर्क मार्ग को बनाया गया था। उस समय बहुत से लोगों की निजी जमीन इस संपर्क मार्ग में चली गई। लेकिन आज तक उन लोगों को सरकार की तरफ से किसी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं मिल पाया है। लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले भी उन्होंने राजस्व मंत्री को इस बाबत चिट्ठी लिखकर मुआवजे की मांग की थी, लेकिन किसी भी सरकार में उन लोगों की आवाज को नहीं सुना। ग्राम पंचायत रायपुर सहोड़ा के पूर्व प्रधान रोशन लाल सहोड़ की मानें तो इस गांव के कई लोगों की जमीन संपर्क मार्ग में गई थी, लेकिन उन्हें आज तक किसी भी सरकार ने मुआवजा नहीं दिया है। रोशन लाल सहोड़ ने बताया कि मैहतपुर-संतोषगढ़ संपर्क मार्ग जब बनाया गया तो उस वक्त निजी जमीन के मालिकों को सरकार ने मुआवजा दिया था। मैहतपुर-संतोषगढ़ संपर्क मार्ग के निर्माण में निजी मालिकों को मुआवजा दिया जा सकता है तो वनगढ़ नंगड़ा संपर्क मार्ग में गई निजी जमीन का मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार से मांग उठाई कि बिना निशानदेही के बनाए गए इन संपर्क मार्गों का निजी भूमि मालिकों को मुआवजा दिया जाए। उधर, लोक निर्माण विभाग के एसई एनपी सिंह का कहना है कि संपर्क मागों के निर्माण के समय जिन लोगों की निजी भूमि सड़क में आती है, उनके लिए अब मुआवजे का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि भूमि की कीमतें बढ़ने के कारण सरकार ने मुआवजा देने के प्रावधान पर रोक लगा दी है। (संवाद)
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