वर्ष 1947 में हुई संतोषगढ़ में विश्वकर्मा मंदिर की स्थापना
दुल्हन की तरह सजेगा मंदिर
नामी कलाकार करेंगे बाबा की महिमा का गुणगान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतोषगढ़ (ऊना)। संतोषगढ़ स्थित प्राचीन बाबा विश्वकर्मा मंदिर की स्थापना 1947 में हुई थी। आसपास के दर्जनों गांवों में यह पहला मंदिर था। दीपावली से तीन दिन तक हर साल सैकड़ों श्रद्धालु यहां भगवान विश्वकर्मा के दर्शन करने आते हैं। मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। इस वर्ष मंदिर अपना 77वां वार्षिक उत्सव मना रहा है। झंडा चढ़ाने की रस्म 22 अक्तूबर को सुबह सात बजे होगी। विभिन्न राज्यों से आए कलाकार और कथावाचक भगवान विश्वकर्मा की महिमा का गुणगान करेंगे। कार्यक्रम में बिलासपुर से भगत गुरदेव एंड पार्टी, सोलन के रामचंद्र रागी एंड पार्टी, पठानकोट से कथावाचक श्याम सुंदर, ऊना के देवी कृष्ण प्रिया दासी और गढ़शंकर से भगत प्रकाश प्रेमी एंड पार्टी सहित अन्य कलाकार भाग लेंगे। 21 अक्तूबर को दीपावली पर भव्य आतिशबाजी का आयोजन होगा। तीन दिन तक मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। मंदिर का संचालन नगर के मान परिवार की ओर से किया जाता है, जिन्होंने इसे एकजुट होकर संभाला है।