ऊना। राज्य सरकार के खिलाफ कुटलैहड़ में आयोजित जन आक्रोश रैली में पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने तीन वर्षों के राजनीतिक अंतराल के बाद सक्रिय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। यह रैली केवल राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं थी बल्कि कुटलैहड़ में वीरेंद्र कंवर की राजनीतिक पकड़ का सशक्त संदेश भी थी। तीन वर्षों बाद उनका यह दमदार शक्ति प्रदर्शन भाजपा संगठन के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है। आगामी दिनों में इसका असर क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर की राजनीति पर देखने लायक होगा। रैली में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपस्थिति ने न केवल क्षेत्रीय सियासत को गर्मा दिया बल्कि भाजपा संगठन के भीतर कई सवाल भी खड़े कर दिए। रैली में वीरेंद्र कंवर ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, धीमे विकास और क्षेत्रीय उपेक्षा के खिलाफ तीखे प्रहार किए। बीजेपी मंडल की कथित मनाही के बावजूद कई कार्यकर्ताओं का समर्थन, वीरेंद्र कंवर की जमीनी स्वीकार्यता को स्पष्ट करता है। दूर-दराज के गांवों से आए समर्थकों ने नारेबाजी कर यह संदेश दिया कि वे उन्हें कुटलैहड़ का प्रमुख नेता मानते हैं और भविष्य में सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद रखते हैं।