ऊना। लेफ्टिनेंट कर्नल एसके कालिया ने बताया कि युद्ध की पृष्ठभूमि साल 1971 की शुरूआत से ही बनने लगी थी। लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने तीन दिसंबर 1971 को अचानक भारत की सीमा में आकर पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर और आगरा आदि सैनिक हवाई अड्डों पर बम वर्षा शुरू कर दी। इस पर भारतीय सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई कर पूर्व में तेजी से आगे बढ़ते हुए जेसोर और खुलना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद युद्ध लगभग 14 दिन चला। 14 दिसंबर को भारतीय सेना ने एक गुप्त संदेश के आधार पर ढाका में पाकिस्तानी सेना के बड़े अधिकारियों की बैठक होने वाली जगह पर मिग-21 से बम गिराकर भवन की छत उड़ा दी। युद्ध में भारतीय सेना ने भी 39,000 जांबाज खोए और 9851 घायल हुए। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान जो कि अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है को आजाद करवा लिया गया। इस ऐतिहासिक जीत की खुशी हर वर्ष 16 दिसंबर को हर देशवासी उन वीर सपूतों के शौर्य, अदम्य साहस, वीरता और पराक्रम को नमन करता है।