संवाद न्यूज एजेंसी
कोलका (ऊना)। बंगाणा उपमंडल के तहत कोलका स्थित गोबिंद सागर झील में हुए हादसे के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपना लिया है। झील किनारे किसी भी श्रद्धालु या पर्यटक को नहीं जाने दिया जा रहा है। दो पुलिस कर्मी मौके पर कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
पर्यटकों की आवाजाही गोबिंद सागर झील किनारे स्थित मंदिर में लगी हुई, लेकिन पुलिस की सख्ती से पर्यटक भी दूर से ही झील का दीदार कर रहे हैं। संवाद टीम ने शुक्रवार दोपहर को गोबिंद सागर झील किनारे पहुंच कर जायजा लिया।
समय दोपहर 12:23 बजे। स्थान गरीब नाथ मंदिर कोलका। संवाद टीम सदस्य कार में पर्यटक के रूप में मंदिर से झील किनारे की तरफ रवाना हुए। कार को झील किनारे देखते हुए पुलिस कर्मी ने सीटी बजाना शुरू कर दिया।
दो-तीन सीटी बजाने पर कोई रिस्पांस न देने पर पुलिस कर्मी ने आवाज लगाई। गाड़ी रुकने पर पुलिस जवान मंदिर परिसर से उतर आया और झील किनारे न जाने की हिदायत दी। हिदायत को अनदेखा करते हुए संवाद टीम मौके पर डटी रही और फोटोग्राफी करती रही।
इस पर एक अन्य पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचा और बीते सोमवार को पंजाब के सात युवाओं के झील में डूबने की जानकारी दी। उन्होंने तुरंत कार को मंदिर के समीप ले जाने कोे कहा। पुलिस कर्मी अशोक ने बताया कि झील किनारे जाने पर मनाही है।
समय दोपहर 12:50 बजे। गरीब नाथ मंदिर के बाहर पुलिस कर्मी तैनात है। पुलिस जवान पंजाब के श्रद्धालुओं को गोबिंद सागर झील किनारे न जाने की हिदायत देता है। इस पर एक श्रद्धालु बोला कि एह गल सही किती।
मंदिर परिसर में भी एक पुलिस कर्मी खड़ा होकर झील के तट की निगरानी कर रहा है। झील के नजारे लेते हुए हिमाचल से ही पहुंचे तीन श्रद्धालु आपस में बीते सोमवार को हुई घटना को लेकर चर्चा कर रहे हैं और सख्ती को सही बता रहे हैं।
समय दोपहर 1:10 बजे। गरीब नाथ मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इस पर मंदिर के बाहर लगे दो लाउडस्पीकर से चेतावनी दी जाती है कि झील किनारे न जाएं अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
इसी दौरान एक बोट घाट पर पहुंची है। कुछ श्रद्धालु बाइक के साथ झील किनारे पहुंचते हैं। एक पुलिस कर्मी टिल्ले पर खड़ा होकर इन श्रद्धालुओं की निगरानी करता रहता है। सवारियों को लेकर बोट रवाना हो जाती है।
समय दोपहर 1:27 बजे। श्रद्धालु बाइक में सवार होकर मंदिर के बाहर पहुंचते हैं। जालंधर से पहुंचे श्रद्धालुओं में कुछ झील को देखकर आकर्षित हो जाते हैं और किनारे जाने की बात कहते हैं। इस पर इनमें से ही एक श्रद्धालु कहता है कि तैंनू सुणदा नी लौडस्पीकर च क्या बोलदे। इस पर श्रद्धालु मंदिर के पास से ही झील का नजारा देख और फोटो खींचकर लौट जाते हैं।