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परमात्मा को देखने के लिए आंखें करनी पड़ती हैं बंद : अतुल

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शिव मंदिर नैहरियां में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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ऊना। नैहरियां स्थित शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भागवताचार्य अतुल कृष्ण ने कहा कि अधिकांश लोग परमात्मा को इसलिए याद करते हैं कि वे नरक जाने से बच जाएं या स्वर्ग प्राप्त कर लें, लेकिन यह सच्चा प्रेम नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रेम तो तब होता है जब भक्त कहे-हे प्रभु, आप जहां हैं, हम वहीं रहेंगे, चाहे वह नरक ही क्यों न हो। जिसने एक बार परमात्मा को चुन लिया, उसके लिए स्वर्ग और नरक का कोई अर्थ नहीं रह जाता। जब हृदय में परमात्मा का प्रेम जागृत होता है, तब संसार अपने आप मिट जाता है। सारी इच्छाएं शांत होकर शून्य में विलीन हो जाती हैं और वहीं से परमात्मा की स्मृति का उदय होता है। संसार को देखने के लिए आंखें खोलनी पड़ती हैं, लेकिन परमात्मा को देखने के लिए आंखें बंद करनी पड़ती हैं। जहां भक्त है, वहीं भगवान हैं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की ओर से महारास, कंस वध, गुरुकुल में विद्याध्ययन, द्वारका नगरी की स्थापना तथा रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा और तन्मयता से श्रवण किया।
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