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काला मोतिया का समय पर इलाज जरूरी : शारदा

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आंखों की रोशनी के लिए खतरा पैदा करने वाला है रोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के सभागार में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के तहत जिलास्तरीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इसमें जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी शारदा सारस्वत ने बताया कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह प्रत्येक वर्ष मार्च में मनाया जाता है। ग्लूकोमा आंखों की रोशनी के लिए खतरा पैदा करने वाला रोग है, जो आंख की नस को खराब कर देता है। इस रोग के कारण 40 साल की उम्र में ही आंखों में दिक्कत शुरू हो जाती है। ग्लूकोमा (काला मोतिया) आमतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों या विशेषकर उन्हें होता है जिनके परिवार में काला मोतिया का इतिहास रहा हो या जिन लोगों की आंख में चोट लगी हो, मधुमेह, गठिया, सांस की बीमारी व एलर्जी से पीड़ित लोग जिनका लंबे समय से इलाज चल रहा है। इलाज में लापरवाही से आंखों की रोशनी भी समाप्त हो सकती है। जिला स्वास्थ्य शिक्षक गोपाल कृष्ण ने बताया कि आंखें हमारे शरीर के सबसे खास और नाजुक अंगों में से एक होती हैं। ग्लूकोमा के मरीजों का इलाज नियमित दवा के उपयोग लेजर या सर्जरी के जरिये केवल शुरुआती दौर में ही संभव है। इस अवसर पर समन्वयक कंचन माला, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक रघुवीर कौर, कमलेश, सुनील कुमार, हिम्कैप्स नर्सिंग कॉलेज बढेडा की नर्सिंग छात्राओं सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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