अंब की अदालत ने झूठा शपथ पत्र देने पर सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
अंब(ऊना)। क्षेत्र के तहत पड़ती एक ग्राम पंचायत के व्यक्ति को अंब की अदालत ने धोखाधड़ी मामले में तीन साल की कैद और 26 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इंदिरा आवास योजना के तहत मिली ग्रांट को अपनी भूमि पर न बनाकर सरकारी भूमि पर बनाने और पंचायत चुनाव के लिए झूठा शपथ पत्र देने के मामले में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। एसीजेएम कोर्ट नंबर एक अंब जज निरंजन सिंह की अदालत ने मंगलवार को मामले में फैसला सुनाया।
सहायक जिला न्यायवादी शिखा राणा ने बताया कि 21 अक्टूबर 2009 को आरोपी ने ततिमा के साथ उसकी संयुक्त भूमि पर 38 हजार 500 रुपये राशि से इंदिरा आवास योजना के तहत मकान के लिए बीडीओ से स्वीकृति हासिल की, जिसने उस राशि से स्वयं के दर्शाए गए खसरा नंबर के बजाय सरकारी जमीन पर मकान बना दिया। आरोपी ने वर्ष 2010 में ग्राम पंचायत अपर लोहारा के प्रधान पद के लिए पंचायत चुनाव लड़ा। इसके लिए उसने एक शपथ पत्र दायर किया, जिसमें उसने किसी भी प्रकार से सरकारी जमीन पर कब्जा अथवा अतिक्रमण से इंकार किया। ग्राम पंचायत चुनाव में प्रधान पद पर जीतने के बाद आरोपी ने शिकायतकर्ता को जिसके साथ उसके अच्छे संबंध नहीं थे, उसे धमकाना शुरू कर दिया।
इस पर शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से मकान बनाने के लिए सरकारी ग्रांट की मंजूरी के बारे में प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के बाद खंड विकास अधिकारी और जिला कलेक्टर से शिकायत की। मामले में 18 अक्टूबर 2011 को नायब तहसीलदार सह एसी द्वितीय श्रेणी ने भी एक आदेश पारित किया था, जिसमें खसरा संख्या 1134/2 के संबंध में एचपी भू-राजस्व अधिनियम 1954 की धारा 163 के तहत आरोपी के खिलाफ जांच की गई और पाया गया कि आरोपी ने सरकारी भूमि पर कब्जा पाए जाने की बात कही गई। मामले की शिकायत के बाद चिंतपूर्णी थाना पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद मामले को अदालत में प्रस्तुत किया। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आईपीसी की धारा 420 के तहत दोषी करार देते हुए तीन साल की कैद और पांच हजार रुपए जुर्माना, धारा 468 के तहत तीन साल की कैद और पांच हजार रुपए जुर्माना, धारा 467 के तहत तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 471 के तहत तीन साल की कैद और पांच सौ रुपये जुर्माना, धारा 447 के तहत तीन साल की कैद और पांच सौ रुपये जुर्माना, धारा 406 के तहत तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना और धारा 1991 के तहत एक साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।