ऊना। जिला में गेहूं की कटाई इन दिनों जोरों पर है, लेकिन बीते वर्षों के मुकाबले इस बार कटाई के तरीके में काफी बदलाव हुआ है। क्षेत्र के बड़े किसान मशीनों से गेहूं की फसल कटवा रहे हैं। विशेषकर कंबाइन हार्वेस्टर मशीन को कटाई कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मुख्य कारण है गेहूं की कटाई में मजदूरी का बेहद महंगा होना।
जानकारी के अनुसार गेहूं की फसल को काटने के बाद उसे बांधने तक की मजदूरी प्रति कनाल जमीन के हिसाब से 1100 रुपये ली जा रही है। इसके बाद बंधी हुई गेहूं की गठरियों को इकट्ठा करना और उसकी थ्रेसिंग करवाना किसानों का काम रहता है। वहीं, अगर मजदूरों से थ्रेसिंग तक की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कहा जाए तो राशि और बढ़ जाती है। इसके मुकाबले कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से एक कनाल जमीन पर गेहूं की फसल काटने का 400 रुपये खर्च आ रहा है। हालांकि इस मशीन से तूड़ी तैयार नहीं होती, लेकिन किसानों का कहना है कि अगर तूड़ी कहीं से खरीद लें तब भी मजदूरी देने के मुकाबले सौदा सस्ता पड़ रहा है। वहीं, अधिकतर किसान मशीन से कटी फसल पर तूड़ी निकालने वाली मशीन का इस्तेमाल अलग से कर रहे हैं, जिससे तूड़ी तैयार हो रही है। इस प्रकार दोनों मशीनों का खर्च भी 800 रुपये प्रति कनाल तक पड़ रहा है, जो कि मजदूरी से काफी सस्ता है।
मजदूरों की मनमानी बढ़ने लगी : किसान
किसान रविंद्र सिंह, महिंद्र सैनी, सौरभ कुमार, अनूप कालिया, राजेश कुमार, विनोद सुदाल ने बताया कि जिले में बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों की मनमानी बढ़ गई है। किसान फसल की कटाई के समय मजबूर होते हैं और उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है, जो कि गलत है। इसके लिए सरकार और प्रशासन को कोई नियम तय करने होंगे।
कोट्स
जिला में किसानों को पेश आ रही समस्याओं को लेकर प्रशासन की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। इसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से मिला था। मजदूरी की सीमा तय करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं।
जतिन लाल, उपायुक्त, ऊना