पत्नी के एक ताने ने राम भोला को बना दिया संत तुलसी दास
रायपुर सहोड़ा शिव मंदिर में भक्त माल कथा का पहला दिन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। जिले के गांव रायपुर सहोड़ा के प्राचीन रामेश्वर शिव मंदिर में भक्त माल की कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को व्यासपीठ से साध्वी सहप्रिया ने प्रभु श्रीराम के परम भक्त संत तुलसी दास की कथा का वर्णन किया। कहा कि तुलसी दास का बचपन का नाम राम भोला था। राम भोला ने अपने गुरु से जो शिक्षा ग्रहण की, उसे एक बार में ही कंठस्थ कर लेते। पत्नी रत्नावली को जब रात्रि में मिलने गए तो पत्नी ने ताना मारते हुए कहा कि इतनी आसक्ति जो मुझ में लगाई है अगर इतनी ही आसक्ति प्रभु श्रीराम से लगाई होती तो आपको ईश्वर के दर्शन न हो जाते। बस यही वह बात थी जिसने राम भोला का समूचा जीवन चरित्र ही बदल दिया। व्यासपीठ से साध्वी सह प्रिया ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए हमारे संतों ने बहुत त्याग किए हैं। अपने बच्चों को दीवारों में चिनवा दिया, किसी ने अपने शरीर की बोटी-बोटी करवाई। संत न होते तो ये संसार जल जाता। ये संतों की कृपा ही है कि प्राणी मात्र को धर्म के मार्ग चलने के लिए ज्ञान रूपी नौका का सहारा देते हैं। कथा में सदना भक्त की भावपूर्ण भक्ति का प्रसंग भी सुनाया और कहा कि ईश्वर अपने भक्त की परीक्षा लेते हैं और जो उस परीक्षा में सफल हो गया तो समझो ईश्वर को पा लिया। इंसान अपने कर्म से ही दुख और सुख को भोगते हैं। इसलिए हमें सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए।