बीते नौ साल में 10 स्कूलों में ही स्थापित हो पाई है टिंकरिंग लैब
विद्यार्थियों को रचनात्मक तरीके से पढ़ाने पर विभाग का रहेगा जोर
अभी तक करीब दो दर्जन स्कूलों में है यह सुविधा
वर्तमान शैक्षणिक सत्र में से दोगुना करने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। इसकी गति अभी बेहद धीमी है। शिक्षा विभाग ने सरकार को एटीएल की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इसकी अनुमति मिलने और बजट जारी होने के बाद धरातल पर कार्य शुरू हो जाएगा। अभी तक जिला के कुछेक स्कूलों में ही विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा मुहैया हो पाई है। जिले में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की प्रक्रिया 2017 में शुरू हुई। नौ साल में अभी तक करीब 10 लैब ही स्थापित हो पाईं। जबकि, शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे कई स्कूल इस सुविधा से वंचित हैं। अटल टिंकरिंग लैब भारत सरकार के अटल इनोवेशन मिशन का एक हिस्सा है। ऐसे लैब पूरे देश के स्कूलों में स्थापित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है, जिससे वे नवीन आविष्कारक बन सकें। एटीएल स्कूल जाने वाले बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं। इससे बच्चों में डिजाइन मानसिकता, कंप्यूटेशनल सोच, अनुकूली शिक्षा, भौतिक कंप्यूटिंग आदि जैसे कौशल विकसित करने में मदद मिलती है। ऊना जिले में अभी तक करीब 10 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में इस प्रकार की लैब स्थापित की गई हैं। इनमें सलोह, बसदेहड़ा, घनारी, मुबारिकपुर, रोड़ा, पेखूबेला, केवी इंटरनेशनल ऊना स्कूल प्रमुख हैं। इसके साथ ही करीब छह और स्कूलों में इस प्रकार की लैब स्थापित करने के लिए कदमताल जारी है। बताया जा रहा कि विभाग इन लैब की संख्या जिले में दोगुना करने के लिए प्रयासरत है। बीते साल जुलाई में शिक्षा निदेशालय ने विभाग से यह पूछा था कि किन स्कूलों के लिए नई अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने के लिए बजट जारी किया जा चुका है। यह बजट कितना है और इसका इस्तेमाल किन कारणों से नहीं हो पाया। यह रिपोर्ट 30 जून तक की जारी होगी। रिपोर्ट जारी होने से बाद आगामी कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार ने कहा कि जिले में अटल टिंकरिंग लैब की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं। सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, जिसपर फैसला आते ही आगामी कदम उठाए जाएंगे। यह बच्चों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी सुविधा है।