विकास से कोसों दूर, सड़क और पुल का दशकों से इंतजार
बरसात में खड्ड बनती है काल, बीमार को अस्पताल और बच्चों को स्कूल पहुंचाना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। जिला ऊना के उपमंडल बंगाणा की उपतहसील जोल की ग्राम पंचायत अम्बेहड़ा धीरज के अंतर्गत आने वाला गांव कैंट आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जहां एक ओर 21वीं सदी का भारत डिजिटल इंडिया और चंद्रयान जैसी सफलताओं की ओर अग्रसर है, वहीं गांव कैंट के कुछ परिवार अब भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण देस राज, सुरिंदर, प्रीतम और बलवंत सिंह बताते हैं कि गांव तक पहुंचने के लिए न कोई पक्की सड़क है और न ही कोई पुलिया। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। खड्ड में तेज बहाव के कारण गांव पूरी तरह मुख्य मार्ग से कट जाता है, जिससे ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करनी पड़ती है। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों नहीं बल्कि कई बार दिनों का इंतज़ार करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक एक व्यक्ति की जान समय पर इलाज न मिल पाने के कारण जा चुकी है। छोटे-छोटे बच्चे भी हर दिन स्कूल जाने के लिए उफनती खड्ड पार करते हैं, और उनके माता-पिता तब तक सांस रोककर बैठे रहते हैं जब तक बच्चे सुरक्षित पार नहीं कर लेते। गांववासियों का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी वे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। पंचायत प्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों ने कभी भी इस दिशा में ठोस पहल नहीं की। उनका सवाल है कि आखिर वे कब तक इस तरह की मुश्किलों में जीने को मजबूर रहेंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की है कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए जल्द से जल्द पक्की सड़क और पुलिया का निर्माण किया जाए। वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं, ताकि उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी और बच्चों की शिक्षा सुरक्षित रह सके। ग्राम पंचायत अम्बेहड़ा धीरज की प्रधान अंजना कुमारी ने स्वीकार किया कि गांव कैंट के लोग अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या को एकीकृत विकास परियोजना के अधिकारियों के समक्ष रखा गया है और उनकी टीम ने खड्ड पर पुलिया निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जल्द ही लोगों को इस समस्या से राहत मिल जाएगी।