ऊना। जीवन में त्याग और प्रेम आ जाए तो सुखों का झरना बहने लगता है। यदि इसके विपरीत स्वार्थ एवं घृणा आ जाए, तो जीवन को नरक बनने में भी देर नहीं लगती।
नगाड़े से निकलने वाली ध्वनि अगर कोई पकड़ना चाहे तो असंभव है, पर यदि नगाड़ा बजाने वाले को ही पकड़ लिया जाए, तो ध्वनि पर अपने आप नियंत्रण हो जाता है। इसी प्रकार सभी के मूल परमात्मा को यदि पकड़ लिया जाए तो सारी परिस्थितियां हमारे अनुकूल हो जाती हैं। उक्त ज्ञानसूत्र श्रीमद्भागवत कथा के समापन सत्र में स्वामी अतुल कृष्ण महाराज ने प्राचीन सिद्धपीठ माता श्री कामाख्या देवी मंदिर पोलियां पुरोहितां अब में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि वास्तव में मनुष्य का बेड़ा तभी पार हो सकता है, जब उसका नाता परमात्मा से जुड़ जाए। जब तक हमारे पास परमात्मा रूपी धन नहीं आता, तब तक हम कंगाल ही बने रहेंगे। संसार में चाहे कितनी ही उपलब्धि क्यों न प्राप्त कर लें, पर रहेंगे प्यासे के प्यासे ही। भगवान के आश्रित होते ही सुख के द्वार स्वतः ही खुल जाएंगे। तिनका पकड़ कर आज तक कोई भी समुद्र पार नहीं हुआ। ऐसे ही संसार की वस्तुओं को पकड़ कर सुखी नहीं हुआ जा सकता। कहा कि बिलकुल सीधा सा गणित है कि ईश्वर पर पूर्ण निर्भरता ही लोक-परलोक सर्वत्र के लिए सुखदायी है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से चिंतपूर्णी क्षेत्र के विधायक सुदर्शन बबलू , कथा के मुख्य यजमान मानसिंह ठाकुर, प्रकाश चंद ठाकुर, सुभाष ठाकुर, कुलभूषण ठाकुर, राजिंदर पाल ठाकुर, रुपेंद्र कुमार डैनी, साहिल ठाकुर, निखिल ठाकुर सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।