समस्या
पूर्व भाजपा की सरकार में 7.40 करोड़ हुए थे मंजूर
जर्जर भवन होने से अन्य चार विभाग भी हुए इधर-उधर
एक जगह दफ्तर न होने से किसान, बागवान, पशुपालक परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। तीन साल से कृषि विभाग का जर्जर कार्यालय गिराया नहीं जा सका है। पूर्व की भाजपा सरकार में सात करोड़ 40 लाख की राशि कृषि विभाग के नए भवन के लिए मंजूर की गई है। तीन साल बीत जाने के बाद भी कृषि विभाग के अधिकारी न तो कृषि विभाग के कार्यालय को डिस्मेंटल कर पाए हैं और न ही नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई पहल करते दिखाई दिए। जहां एक ही छत के नीचे कृषि विभाग के कार्यालय में आत्मा, मृदा परीक्षण, भू संरक्षण सहित कृषि कार्यालय की सुविधा किसानों, बागवानों और पशुपालकों को मिलती थी। अब जाकर आत्मा परियोजना का कार्यालय डीसी ऑफिस के पुराने भवन और मृदा परीक्षण का कार्यालय पेखूबेला, भू संरक्षण का कार्यालय बचत भवन में शिफ्ट कर दिया है। इससे कृषि विभाग कार्यालय में कामकाज के लिए पहुंच रहे किसान, बागवान और पशुपालक सरकार की योजना का लाभ लेने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। पहले एक ही छत के नीचे सभी दफ्तर होने की सूरत में लोगों को काफी फायदा मिलता था। वर्तमान में कार्यालय इधर-उधर होने से सीधे तौर पर किसान, बागवान और पशुपालक प्रभावित हुए हैं। जर्जर भवन होने की सूरत में कृषि विभाग ने भी हाल ही में कृषि उपज मंडी के यार्ड में अपना कार्यालय शिफ्ट कर लिया है। आत्मा परियोजना के निदेशक डाॅक्टर वीरेंद्र कुमार बग्गा के अनुसार उन्हें रोजाना 10 से 15 किसान, बागवान और पशुपालकों के फोन विभिन्न प्रकार के कार्यालय का पता लगाने के लिए आते हैं। अगर समय रहते कृषि विभाग के अधिकारियों ने भवन को डिस्मेंटल किया होता तो आज भव्य भवन बनकर तैयार होता और एक ही भवन के नीचे तमाम तरह के कृषि से संबंधित विभागों की सुविधा सीधे तौर पर आम जनता को मुहैया होतीं। वर्तमान में लोग दफ्तर ढूंढने के लिए चक्कर लगाकर थक रहे हैं और संपर्क बनाने में जुड़े हुए हैं। दूसरी ओर कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक डॉक्टर कुलभूषण धीमान के अनुसार भवन को डिस्मेंटल करने की मंजूरी मिल गई है। इसी महीने भवन को डिस्मेंटल कर नए भवन का निर्माण कार्य करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए जाएंगे।