द्रोण महादेव शिव मंदिर शिवबाड़ी में लगाए गए गणेश स्वयं सहायता समूह के स्टाल का अवलोकन करते एसडी
गगरेट (ऊना)। द्रोण महादेव शिव मंदिर शिवबाड़ी अंबोटा ट्रस्ट की एक छोटी सी पहल ने स्वावलंबी बनने का प्रयास कर रही गणेश स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऐसा मंच प्रदान किया है कि उनके उत्पाद हाथों-हाथ बिकने लगे हैं। अन्य राज्यों तक इन उत्पादों की महक भी पहुंचने लगी है। बुरांस के फूलों का महिलाओं द्वारा तैयार किया स्क्वैश, लसूड़े का अचार, मिलेट की सवेइयां, तरह-तरह के अचार व पहाड़ी शहद द्रोण महादेव शिव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को यूं भा रहा है कि स्वयं सहायता समूह डिमांड पूरी नहीं कर पा रहा है। ऐसे प्रयास अगर प्रदेश के अन्य देव स्थानों पर हों तो इससे हिमाचली उत्पादों को तो बाजार मिलेगा ही बल्कि ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को स्वावलंबी बनने में देर नहीं लगेगी। विकास खंड गगरेट के अंबोटा गांव की निशु सूद पिछले कई सालों से स्वावलंबन की राह ताक रही थीं। हालांकि उनके पास हुनर था लेकिन इसका उपयोग कर कैसे आगे बढ़ा जाए, वह रास्ता नहीं मिल रहा था। इसी बीच निशु सूद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं तो मानों उनके सपने को उड़ान मिल गई। निशु सूद द्वारा तैयार उत्पाद प्रदेश सहित देश भर में सराहे गए। इन उत्पादों की बदौलत उन्हें ऐसी पहचान मिली कि उन्हें राज्यपाल व कई केंद्रीय मंत्रियों द्वारा सम्मानित किया गया। यही नहीं बल्कि उनके द्वारा तैयार किए गए नमक को हिम ईरा के माध्यम से ऐसी पहचान मिली कि इनका नमक अब एमेजान पर भी उपलब्ध है। हालांकि पहले निशु सूद को अपने साथियोें के साथ अपने उत्पाद बेचने के लिए प्रदेश के कोने-कोने में लगने वाले मेलों में पहुंचना पड़ता था लेकिन एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम को जब इनके हुनर का पता चला और द्रोण महादेव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं तक इनके उत्पाद पहुंचे, इसके लिए उन्होंने गणेश स्वयं सहायता समूह को मंदिर परिसर में स्टाल लगाने की इजाजत दी। महिलाओं द्वारा खुद हाथों से तैयार किए जाने वाले नेचुरल उत्पाद श्रद्धालुओं को इतने भाने लगे कि अब गणेश स्वयं सहायता समूह द्रोण महादेव मंदिर में लगाए गए स्टाल से ही रोजाना तीन से चार हजार रुपये के उत्पाद बेच रहा है। एसडीएम सौमिल गौतम ने बताया कि गणेश स्वयं सहायता समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पाद मिलावट से दूर हैं और स्वाद में भी बेहतर हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें, इसके लिए ही इन्हें प्रोत्साहित किया गया है।