ऊना। सरकारी स्कूलों में अध्यापकों के साथ विद्यार्थियों की हाजिरी भी ऑनलाइन लगाने का प्राथमिक स्कूलों के प्रबंधकों ने विरोध किया है। उनका तर्क है कि जब किसी व्यवस्था को लागू करने के लिए पूरी सुविधाएं ही नहीं हैं, तो उसका क्या लाभ।
स्कूल प्रबंधकों ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में न इंटरनेट की सुविधा है और न पर्याप्त स्टाफ। ऐसे में आए दिन पढ़ाई के अलावा अध्यापकों पर गैरशिक्षण कार्यों का बोझ लादना कहां तक उचित है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा, महासचिव सत्येंद्र मिन्हास ने बताया कि प्राथमिक स्कूलों में तो अभी अध्यापकों की ऑनलाइन हाजिरी शत-प्रतिशत नहीं हो सकी। इस बीच अब बच्चों की हाजिरी भी ऑनलाइन फीड करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में तो पहले ही अध्यापकों की भारी कमी है। एक से दो अध्यापकों के जिम्मे पूरे स्कूल की व्यवस्था है। ऐसे में अध्यापक बच्चों को पढ़ाएं या ऐसे कार्यों में पूरा दिन लगाएं।
उन्होंने कहा कि पहले स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा दी जाए। कई स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं तक का बंदोबस्त है, लेकिन बिना इंटरनेट सुविधा के कैसे उन कक्षाओं का संचालन हो। अध्यापक जैसे-तैसे अपने फोन के जरिए स्मार्ट कक्षाओं का संचालन करते हैं। इस बीच अध्यापकों की हाजिरी को ऑनलाइन किया गया, जिसे भी अध्यापक फोन के जरिए अपलोड करते हैं, जबकि इसके लिए कंप्यूटर सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों के लिए अतिरिक्त नियुक्ति भी होनी चाहिए।
कोट्स
प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की हाजिरी ऑनलाइन के आदेश उच्चाधिकारियों की ओर से भेजे गए हैं। अगर कहीं व्यवस्थाएं बनाने में परेशानी हो रही है, तो विभाग उसको लेकर कदम उठाएगा। हालांकि नई नियुक्तियों को लेकर अंतिम फैसला सरकार की ओर से लिया जाएगा।
सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, जिला प्राथमिक शिक्षा विभाग