ऊना। जिला में कई स्कूल ऐसे हैं, जो सड़कों से सटे हुए हैं। वहां हर समय विद्यार्थियों पर सड़क हादसों का खतरा रहता है। कुछ स्कूलों में तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए मुख्य गेट बंद रखा जाता, तो वहीं ऐसे स्कूल भी हैं, जहां बच्चों की निगरानी राम भरोसे हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पंडोगा में भी स्थिति ऐसी ही है। यहां स्कूल समय के दौरान भी कई बार बच्चे परिसर से निकलकर सड़कों पर पहुंच जाते हैं। चिंता की बात यह है कि उन्हें रोकने वाला भी कोई नहीं। ऊना-गगरेट मुख्य मार्ग से बिल्कुल सटे पंडोगा स्कूल में प्राथमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का परिसर एक साथ है। ऐसे में वहां 500 के करीब विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। सुबह, दोपहर और छुट्टी के समय बच्चे जिस तरह सड़कों पर निकलते हैं, उससे हर समय किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। हालांकि स्कूल के आसपास स्पीड तो ब्रेकर लगाए गए हैं, लेकिन वाहन चालक ब्रेक कम ही लगाते हैं और सड़क पर तेज रफ्तार में दनदनाते हुए आगे बढ़ जाते हैं।
उधर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के कुछ कमरे अभी निर्माणाधीन हैं। ऐसे में वोकेशनल कोर्स की कक्षाएं सड़क को पार कर खेल मैदान में बने कमरों में लगाई जाती हैं। ऐसे में बच्चों को दिन में कई बार सड़क पार करनी पड़ती है। आधी-छुट्टी के समय भी बच्चे बेरोकटोक दुकानों से खरीदारी करने के लिए भागते हैं। जल्दबाजी में कई बार सड़क भी देखकर पार नहीं करते, जिससे हादसे का डर रहता है। उधर, स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई अध्यापक, स्टाफ सदस्य, कर्मचारी इसकी निगरानी नहीं करता कि बच्चे बिना किसी आवश्यकता के बाहर जा रहे हैं, जिससे स्कूल में अनुशासन के माहौल पर भी सवाल उठते हैं।
प्राथमिक स्कूल में व्यवस्था बेहतर
साथ लगते प्राथमिक स्कूल में व्यवस्थाएं बेहतर नजर आती हैं। यहां सुबह के समय बच्चों को स्कूल में प्रवेश करवाकर बाहर नहीं भेजा जाता। स्कूल का गेट भी बंद रखा जाता है। वहीं, दोपहर को आधी छुट्टी के समय मिड-डे मील परोसा जाता है। ध्यान रहे कि वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पंडोगा स्कूल की गिनती जिला के बेहतरीन सरकारी स्कूलों में होती है। यहां आसपास के गांवों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। सवाल उठता है कि अगर अच्छे स्कूलों में लापरवाही बरती जाएगी, तो अन्य स्कूल किस प्रकार इनसे सीखकर आगे बढ़ पाएंगे।
कोट्स
Iजिला में सड़क किनारे स्थित स्कूलों को सड़क सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम उठाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से दिशा-निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग भी लगातार इस बारे में आगाह करता रहा है। अगर इस प्रकार की लापरवाही कहीं पाई जाती है तो निश्चित तौर पर इसे सुधारने की हिदायत जारी होगी।I
राजेंद्र कौशल, उपनिदेशक, जिला उच्चतर शिक्षा विभाग
पंडोगा स्कूल के बाहर सड़कों पर घूमते छात्र
पंडोगा स्कूल के बाहर सड़कों पर घूमते छात्र
पंडोगा स्कूल के बाहर सड़कों पर घूमते छात्र