ऊना। हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर चंबा जिला के डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से पहली अप्रैल से शुरू की गई सामाजिक न्याय यात्रा वीरवार को ऊना जिला पहुंची। यात्रा इससे पहले चुराह, चंबा सदर, भटियात से होते हुए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, सोलन जिला में प्रवेश कर चुकी है। राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर शुरू की गई सामाजिक न्याय यात्रा तब तक चलती रहेगी, जब तक राज्य सरकार, चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे अनुसार कानून बनाने की घोषणा नहीं करती है। पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में प्रदेश सरकार को चेताया है कि मानसून सत्र में विस का घेराव किया जाएगा और जब तक सत्र चलेगा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग पिछले तीन वर्षों से राज्य सरकार के साथ नियमित रूप से की जा रही है। इसके लिए सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में सामाजिक और आर्थिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर प्रदेश में कार्यरत 30 के लगभग विभिन्न सामाजिक संगठन अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निधि कानून के लिए राज्य गठबंधन के रूप में संगठित हुए। राज्य गठबंधन की ओर से सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी डीपी चंद्रा, सुखदेव विश्वप्रेमी, एडवोकेट नरेश कुमार सैंसोवाल, जिला कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष बलराम महे, गुरु रविदास महासभा ऊना की जिला प्रधान शकुंतला संधू, नेशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस के राज्य संयोजक राजकुमार महे तथा हरिचंद संधू ने कहा कि राज्य गठबंधन द्वारा, हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निधि कानून बनाने मांग को लेकर पिछले तीन वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं, परंतु इस दिशा में अभी तक सरकार की ओर से कोई भी कार्यवाही नहीं गई।