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श्रीमद्भागवत कथा मुक्ति का शंखनाद : अतुल

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ऊना। यह चिंतन का विषय है कि चित में अशांति या अभाव का क्या कारण है। क्या हम अनेक प्रकार के अभावों से घिरे हुए हैं। वह कौन सी वस्तु है जिसके प्राप्त होते ही हमारे सारे अभाव मिट जाएंगे। निश्चय ही इस प्रश्न का उत्तर होगा परमात्मा। जब तक ईश्वर का सानिध्य नहीं मिलता तब तक अभावों से मुक्ति नहीं हो सकती। यह वचन ठाकुरद्वारा बढेड़ा श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन अतुल कृष्ण महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मुक्ति का शंखनाद है। मछली तभी तक स्वतंत्र है जब तक कांटे में लगे स्वादिष्ट पदार्थ से दूर है। वह जब कांटे में लगे पदार्थ का स्वाद लेने को तत्पर होती है तो अपने प्राण गंवा कर नाश को प्राप्त हो जाती है। कथा में पूतना वध, शकटासुर-तृणावर्त उद्धार, मृदाभक्षण, माखन चोरी की लीला, कालिया नाग का मर्दन एवं गोवर्धन धारण का प्रसंग लोगों ने अत्यंत श्रद्धा से सुना। इस अवसर पर भगवान को छप्पन भोग भी अर्पित किया।
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