बोले-बड़े ठेकेदारों को ही है खुले बाजार से सीमेंट खरीदने की अनुमति
सिविल सप्लाई से सीमेंट की उपलब्धता हर समय नहीं होती
लेबर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू करना अन्यायपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के छोटे सरकारी ठेकेदारों ने भेदभाव और बढ़ते आर्थिक बोझ पर कड़ा विरोध जताया है। ठेकेदारों का कहना है कि सरकार की ओर से लेबर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। इस नीति के चलते छोटे ठेकेदारों का कामकाज ठप हो रहा है और उनके साथ काम करने वाले मजदूर भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। छोटे ठेकेदारों में सचिन ठाकुर, राजेश कुमार निक्कू, ओम प्रकाश और अश्वनी कुमार का कहना है कि उन्हें सरकार से सीमेंट खुले बाजार की दरों पर सिविल सप्लाई के माध्यम से खरीदने का आदेश दिया गया है। हालांकि, सिविल सप्लाई से सीमेंट की उपलब्धता हर समय नहीं होती। इस कारण उन्हें और उनकी लेबर को कई दिनों तक खाली बैठना पड़ता है। इसके विपरीत बड़े ठेकेदारों को खुले बाजार या नॉन-ट्रेडिंग सीमेंट खरीदने की अनुमति दी गई है। वे बिना रुकावट अपने काम को सुचारु रूप से चला रहे हैं। छोटे ठेकेदारों ने सवाल उठाया है कि विकास कार्यों में योगदान देने वाले ठेकेदारों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है। इन ठेकेदारों ने लोक निर्माण मंत्री से आग्रह किया है कि लेबर पर लगाई गई 18 प्रतिशत जीएसटी को तुरंत समाप्त किया जाए। इसके साथ ही छोटे ठेकेदारों को भी बड़े ठेकेदारों के समान खुले बाजार से सीमेंट खरीदने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि यह कदम न केवल ठेकेदारों और मजदूरों को राहत देगा, बल्कि विकास कार्यों की गति को भी तेज करेगा। छोटे ठेकेदारों का कहना है कि उनकी समस्याओं को सरकार की ओर से लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण नीति से न केवल उनके परिवारों का गुजारा मुश्किल हो रहा है। बल्कि निर्माण कार्य भी धीमा पड़ रहा है।