नारी (ऊना)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जा रही 10वीं और 12वीं कक्षाओं की परीक्षाएं जारी हैं। विभाग और बोर्ड द्वारा डिप्टी डायरेक्टर, एसडीएम और प्रधानाचार्य के नेतृत्व में बनाए गए उड़नदस्ते सक्रियता से अपना कार्य तो कर रहे हैं, परंतु 1983 के नकल विरोधी एक्ट तथा सुपरविजन और उड़नदस्तों को नियमानुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कैसे करना है। इसकी जानकारी कई उड़नदस्तों में शामिल कर्मचारियों को नहीं है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र ठाकुर, अशोक कुमार, डॉ. एनआर राणा, डॉक्टर आरआर शर्मा, शिक्षाविद राजेंद्र शर्मा, कर्मपाल सिंह, सुशील कुमार तथा कुछ जनप्रतिनिधियों में ग्राम पंचायत प्रधान राम कुमार, पूर्व जिला परिषद सदस्य सोमपाल का कहना है कि विभाग और स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा नियुक्त किए गए उड़नदस्तों की कार्य प्रणाली में खामियां पाई जा रही हैं, जिससे बच्चों को पेपर हल करने में बाधा उत्पन्न हो रही हैं। उड़नदस्तों का स्टाफ परीक्षा भवन में निगरानी करते हुए अपने मोबाइल से फोटो खींचते हैं। कुछ बच्चों का तो यह भी कहना है प्रश्न पत्र की फोटो खींचते भी देखे गए हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। इसके अतिरिक्त उड़नदस्तों के गले में पहचान पत्र होना जरूरी है। उड़नदस्ते के इंचार्ज को छोड़कर साथ आए कर्मचारी अपना पहचान पत्र कोऑर्डिनेटर को दिखाएं तथा परीक्षा भवन में दाखिल होने से पहले समन्वयक को भी साथ रखें। उड़नदस्ते के इंचार्ज अपने अधीन किसी भी कर्मचारी को कई बार केद्रों में बैठाकर चले जाते हैं, जो कि साधारण कर्मचारी होने के नाते निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते हैं।
उधर, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉक्टर विशाल शर्मा का कहना है कि बोर्ड द्वारा लगाए गए उड़नदस्तों को पहले ही नियमों की जानकारी दी गई है, परंतु स्थानीय स्तर पर जो उड़नदस्ते नियुक्त किए जाते हैं, उन्हें भी इन नियमों के बारे में सतर्क कर दिया जाएगा, ताकि परीक्षाएं सुचारू रूप से चलें। संवाद